॥ रामाज्ञा प्रश्न ॥
॥ रामाज्ञा प्रश्न ॥ गोस्वामी तुलसीदास जी की एक अनुपम रचना है, जिसे भक्तजन सदियों से शकुन-विचार और मार्गदर्शन के लिए पढ़ते आए हैं। जब मन किसी दुविधा में अटक जाता है — यात्रा करें या नहीं, कार्य आरंभ करें या प्रतीक्षा करें, कोई निर्णय लें या टालें — तब इस ग्रंथ का एक दोहा उत्तर की दिशा दिखा देता है।
ग्रंथ की संरचना
इस ग्रंथ में सात सर्ग हैं, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक, और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — इस प्रकार कुल 343 दोहे। विशेषता यह है कि हर दोहा रामकथा का कोई न कोई प्रसंग है, और वही प्रसंग प्रश्न का फल बन जाता है। प्रथम सर्ग मंगलाचरण से आरंभ होता है, बीच के सर्गों में श्रीराम-जन्म से लेकर लंका-विजय तक की कथा आती है, और सप्तम सर्ग में शकुन देखने की विधि तथा वार-विचार बताया गया है।
प्रश्न पूछने की विधि
- शुद्ध मन से, श्रद्धापूर्वक बैठें।
- श्रीराम का स्मरण करें और अपना प्रश्न मन में स्पष्ट रखें।
- बिना सोचे-समझे १ से ७ के बीच तीन संख्याएँ चुनें — पहली सर्ग की, दूसरी सप्तक की, तीसरी दोहे की।
- उसी क्रम का दोहा पढ़ें — वही आपका उत्तर है।
इस श्रेणी में क्या मिलेगा
यहाँ रामाज्ञा प्रश्न के सभी 343 दोहे क्रमवार दिए गए हैं। प्रत्येक दोहे के साथ मिलेगा:
- मूल दोहा — तुलसीदास जी की मूल भाषा में
- शब्दार्थ — कठिन शब्दों का सरल हिंदी अर्थ
- भावार्थ / व्याख्या — दोहे का पूरा भाव, विस्तार से
- शकुन फल — किस प्रकार के प्रश्न में क्या परिणाम माना गया है
कहा गया है कि श्रद्धा ही इस ग्रंथ की कुंजी है। जो सच्चे मन से पूछता है, उसे मार्ग अवश्य दिखाई देता है।