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महाकुम्भ मेला
॥ धर्म परिक्रमा ॥, ॥ विविध ॥

क्यों विशेष है प्रयाग में होने वाला महाकुम्भ?

इस साल महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा इस बार का कुम्भ बहुत ही विशेष है। वैसे तो कुम्भ का आयोजन हर १२ वर्ष के बाद प्रयागराज में संगम तट पर होता है। लेकिन इस बार का कुम्भ सामान्य कुम्भ नहीं है। इस बार का कुम्भ महाकुम्भ है जो १४४ वर्षो में एक बार आयोजित किया जाता है। महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम है। यहां लाखों लोग पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं। मान्यता है कि इससे उनके पाप धुल जाते हैं और जीवन में सफलता मिलती है।

भगवाव शिव
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इश्वर की खोज

हृदय रूपी मंदिर में बैठे हुए ईश्वर को देखने के लिए मन रूपी द्वार का बंद होना अति आवश्यक है, क्योंकि मन रूपी द्वार संसार की तरफ़ खुला हुआ है और हृदय रूपी मंदिर की ओर बंद है।

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श्रावण मास, शिवजी को अर्पित करते हैं 15 तरह के फूल

श्रावण मास में भगवन शिव की पूजा का विशेष महत्व रहता है। भगवान् शिव की पूजा में कुछ विशेष प्रकार के फूल एवं फल चढ़ाये जाते हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि। आइये जानते हैं भगवान शिव को कौन कौनसे फूल और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।

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संस्कृत भाषा का सौंदर्य

संस्कृत में चमत्कार देखिये..! क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोटौठीडढण: । तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह ।। अर्थात्- पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल

Puran
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जाने हमारे 18 पुराणों के बारे मे

महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित किये गये हैं। आइए जानते है 18 पुराणों के बारे में।

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सीधा पढें तो राम कथा, उल्टा कर के पढें, तो कृष्ण कथा

दक्षिण भारत का एक अति दुर्लभ ग्रन्थ ऐसा भी है जो हमारे सनातन धर्म कि अमूल्य धरोहर है । क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण कथा के रूप में होती है। इस ग्रंथ का नाम है राघवयादवीयम्। जाने इस अद्भुत कृति के बारे में।

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