कामाख्या मंदिर, असम

कामाख्या मंदिर, असम — शक्तिपीठ, रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम

भारत के 51 शक्तिपीठों में सबसे रहस्यमयी और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है माँ कामाख्या मंदिर, जो असम की राजधानी गुवाहाटी के पास नीलांचल…
nirvana shatakam

निर्वाण षट्कम्: शुद्ध आत्मा की पुकार

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा…

५१ शक्तिपीठ: माँ शक्ति की दिव्य स्थलों की अद्भुत यात्रा

भारत की धार्मिक चेतना में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी माँ की पूजा न केवल ऊर्जा के रूप में, बल्कि सृष्टि की आधारशिला के रूप में भी…
Astadasha Maha Shakti Peethas

अष्टादश महाशक्ति पीठ

जहाँ ५१ शक्तिपीठ माँ सती के शरीर के अंगों के पृथ्वी पर गिरने से उत्पन्न हुए थे, वहीं अष्टादश महाशक्ति पीठ (18 Maha Shakti Peethas) उन विशिष्ट स्थलों को कहा…

॥ कथा संग्रह ॥

हमारे रामायण, महाभारत, रामचरितमानस, श्रीमद्भवतगीता, मनुस्मृति, वेद, उपवेद, 200 उपनिषद, महापुराण अदि ग्रंथो में बहुत सारे रोचक और ज्ञानवर्धक प्रसंगो का उल्लेख है। आप यहाँ पर इन कथाओं का संग्रह पढ़ सकते है।

५१ शक्तिपीठ: माँ शक्ति की दिव्य स्थलों की अद्भुत यात्रा

भारत की धार्मिक चेतना में शक्ति की उपासना का विशेष स्थान है। देवी माँ की पूजा न केवल ऊर्जा के रूप में, बल्कि सृष्टि की आधारशिला के रूप में भी की जाती है। ऐसी मान्यता है कि माँ सती के…

बालकृष्ण और शिव मिलन – जब भोलेनाथ ने लाला के दर्शन किए

जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय भगवान शिव समाधि में लीन थे। जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि स्वयं श्रीहरि ब्रज में बालक रूप में अवतरित हुए हैं, उनका हृदय दर्शन की लालसा से भर उठा। शिवजी ने योगी…
Rishi Markandeya Ki Kahani

मृत्यु पर विजय पाने वाले अमर ऋषि — महर्षि मार्कंडेय

ऋषि मार्कंडेय — एक ऐसे शिव भक्त, जिन्होंने अपनी तपस्या और श्रद्धा से मृत्यु को भी पराजित कर दिया। उनकी कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति से कुछ भी संभव है। ईश्वरीय आशीर्वाद से जुड़ी यह दिव्य कथा उस बाल…
Jagannath Ji Has Big Eyes

जगन्नाथ जी की आँखें बड़ी क्यों हैं? एक दिव्य प्रेमगाथा

भगवान श्रीजगन्नाथ जी की आँखें सामान्य नहीं हैं — वे बड़ी, गोल और विस्फारित हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन बड़ी आँखों के पीछे क्या रहस्य है? यह केवल एक मूर्ति की विशेषता नहीं, बल्कि एक अद्भुत…
नारद जी और हनुमान जी

नारद जी और हनुमान जी का प्रसंग

यह कहानी भगवान श्रीहरि और उनके अनन्य भक्तों नारद मुनि और हनुमान जी के बीच के संवाद को दर्शाती है। यह कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि भगवान भक्तों की सच्ची भक्ति को किस प्रकार देखते और उसका…
नारद

नारायण नारायण !

जब भगवन विष्णु ने नारद मुनि को सिखाया की मनुष्य का भाग्य केवल प्रारब्ध से निर्मित नहीं होता, अपितु सद्कर्म और आशीर्वाद से भी प्रभावित होता है।

॥ धर्म चर्चा ॥

भारतीय संस्कृति, हिन्दू धर्म के कुछ ज्ञात अज्ञात प्रसंग, संस्कार, रीति-रस्म, संस्कृति के बारे में आप यहाँ पढ़ सकते है।

nirvana shatakam

निर्वाण षट्कम्: शुद्ध आत्मा की पुकार

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत स्वरूप का वर्णन किया गया है।…
Astadasha Maha Shakti Peethas

अष्टादश महाशक्ति पीठ

जहाँ ५१ शक्तिपीठ माँ सती के शरीर के अंगों के पृथ्वी पर गिरने से उत्पन्न हुए थे, वहीं अष्टादश महाशक्ति पीठ (18 Maha Shakti Peethas) उन विशिष्ट स्थलों को कहा गया है, जिनका उल्लेख स्वयं आदि शंकराचार्य और विभिन्न पुराणों…
lord-Ram

मूर्ति, प्रतिमा या विग्रह? जानिए देवी-देवताओं से जुड़ी मंदिर वास्तु और विज्ञान की गहराई

हमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप विराजमान हैं — उन्हें कभी मूर्ति, कभी प्रतिमा, तो कभी विग्रह कहा जाता है। लेकिन क्या ये तीनों शब्द एक ही चीज़ के लिए हैं? उत्तर है — नहीं। इनके पीछे गहरे दार्शनिक, धार्मिक और वैज्ञानिक…

उनचास मरुत: सुंदरकांड में छिपा वह रहस्य जिससे आज का विज्ञान भी अनभिज्ञ है

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड के 25वें दोहे में एक गूढ़ रहस्य छिपा है, जिसे जानकर न सिर्फ आध्यात्मिक जिज्ञासा शांत होती है, बल्कि आधुनिक मौसम विज्ञान भी हैरान रह सकता है।
Hanuman Ji

हनुमान जी की मूर्ति पर आखिर क्यों लगाते हैं सिंदूर

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर। बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।। अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल हैं और लंबी सी पूंछ हैं। वज्र के समान बलवान शरीर हैं जो राक्षसों का संहार करते…
Ganesh JI

सर्वप्रथम गणेशजी की ही पूजा क्यों की जाती है ?

हिंदी में एक मुहावरा है: श्री गणेश करना जिसका अर्थ है किसी भी कार्य का शुभारम्भ। तो आइये फिर जानते हैं की क्या कारण है की ब्रह्मा, शिव, विष्णु और अन्य कई दिग्गज भगवानों की बजाय सर्वप्रथम पूजा गणपति की…

॥ धर्म परिक्रमा ॥

भारत अनगिनत मंदिरो का देश है। हम अपने आस पास श्री राम, कृष्णा, विष्णु, शिव, दुर्गा, काली, गणेश तथा श्री हनुमान जी के मंदिर हर जगह देख सकते है। इन मंदिरो की तथा इन धार्मिक यात्राओं के बारे में आप यहां पढ़ सकते है

कामाख्या मंदिर, असम

कामाख्या मंदिर, असम — शक्तिपीठ, रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम

भारत के 51 शक्तिपीठों में सबसे रहस्यमयी और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है माँ कामाख्या मंदिर, जो असम की राजधानी गुवाहाटी के पास नीलांचल…
Mangala Gauri Temple

मंगला गौरी का दरबार, गया

भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गया (Gaya, Bihar) का विशेष स्थान है। जहां एक ओर यह स्थान पिंडदान और मोक्ष के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह मंगला गौरी शक्तिपीठ (Mangala Gauri Shaktipeeth) के कारण भी अत्यंत…
बिरजा मंदिर, जाजपुर

बिरजा मंदिर, जाजपुर

ओडिशा के जाजपुर में स्थित बिरजा मंदिर (Biraja Temple) न केवल एक प्राचीन शक्तिपीठ है, बल्कि यह भारत का एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ भी है जहां पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है। यह मंदिर देवी सती के नाभि के स्थान पर…
Achaleshwar Mahadev Temple Gwalior

अचलेश्वर महादेव मंदिर, ग्वालियर

मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर सिर्फ अपने किले और संगीत परंपरा के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि यहां एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है जिसे देखने और दर्शन करने हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं — यह है अचलेश्वर महादेव…
Baba Baidyanath Jyotirling

बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: एकमात्र शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग का संगम

क्या आप जानते हैं? बाबा बैद्यनाथ धाम भारत का एकमात्र ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों का संगम है। यहां रावण की घोर तपस्या, भगवान शिव की कृपा, सती का हृदयपात और चंद्रकांत मणि की अद्भुत महिमा — सभी…
महाकुम्भ मेला

क्यों विशेष है प्रयाग में होने वाला महाकुम्भ?

इस साल महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा इस बार का कुम्भ बहुत ही विशेष है। वैसे तो कुम्भ का आयोजन हर १२ वर्ष के बाद प्रयागराज में…

॥ मंत्र एवं आरती ॥

आरती हिन्दू उपासना की एक विधि है। पूजा के अंत में आराध्य भगवान की आरती करते हैं। यह खंड कुछ लोकप्रिय मंत्र, आरती एवं स्त्रोत का संकलन है। हम प्रयास करते हैं की यथासंभव हिंदी में अर्थ भी संगृहीत किया जाए।

nirvana shatakam

निर्वाण षट्कम्: शुद्ध आत्मा की पुकार

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत स्वरूप का वर्णन किया गया है।…

श्री शिवानन्द लहरी

शिवानन्दलहरी आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित शिव-स्तोत्र है। इसमें विभिन्न छन्दों के सौ श्लोक हैं। इसकी रचना आदि शंकर ने तब की थी जब वे श्रीशैलम में निवास कर रहे थे। यह मल्लिकार्जुन और भ्रमराम्बिका की स्तुति से आरम्भ होता है…
रामायणजी की आरती

रामायणजी की आरती

आरती श्रीरामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।। गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद।। सुक सनकादि सेष अरु सारद। बरनि…
Bhagvati-strot

श्री भगवती स्तोत्रम्

माँ भगवती का यह सुन्दर “श्रीभगवती स्तोत्र”  का रोज पाठ करने वाले के ऊपर भगवती सदा ही प्रसन्न रहती हैं।  व्यास मुनि द्वारा रचित  जय भगवति देवि नमो वरदे, जयपापविनाशिनी बहुफलदे  स्त्रोत  

॥ श्री रामचरितमानस ॥

इस खंड में सम्पूर्ण रामचरित मानस का संकलन किया गया है। यदि आप प्रतिदिन इस खंड के एक – एक लेख को भी पढ़ते जाएंगे एवं साथ में इसके वीडियो को देखेंगे तो कुछ ही समय में आप सम्पूर्ण राम चरित मानस का पठान श्रवण कर लेंगे।

॥ व्रत एवं त्योहार ॥

लगभग सभी महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत, उपवास एवं त्यौहार की तिथियां, पूजन विधि, तथा व्रत की कथा के बारे में आप यहां पढ़ सकते है। स्थान के अनुसार पूजन विधि एवं समय में कभी कभी कुछ अंतर आ जाता है।

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नवरात्रि की महाष्टमी पर हम कन्या पूजन क्यों करते हैं ?

नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र की सप्‍तमी से कन्‍या पूजन शुरू हो जाता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।

हमारे नए वीडियो

यहाँ आप हमारे नए वीडियो को देख सकते हैं। सारी वीडियो को देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल पर जाएँ।

हमारे बारे में

“कथा संग्रह” वेबसाइट का एकमात्र उद्देश्य सनातन हिन्दू धर्म का प्रचार एवं प्रसार है। हमारे धर्म में ढेर सारे पौराणिक ग्रंथो है। इसमें कई कथाएं एवं प्रसंग हैं। कुछ के बारे में हम जानते हैं कुछ के बारे में नहीं। इन प्रसंगो को एक जगह एकत्रित करने का ये एक प्रयास भर है।
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