कामाख्या मंदिर, असम — शक्तिपीठ, रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम
भारत के 51 शक्तिपीठों में सबसे रहस्यमयी और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है माँ कामाख्या मंदिर, जो असम की राजधानी गुवाहाटी के […]
भारत अनगिनत मंदिरो का देश है। हम अपने आस पास श्री राम, कृष्णा, विष्णु, शिव, दुर्गा, काली, गणेश तथा श्री हनुमान जी के मंदिर हर जगह देख सकते है। इन मंदिरो की तथा इन धार्मिक यात्राओं के बारे में आप यहां पढ़ सकते है।
भारत के 51 शक्तिपीठों में सबसे रहस्यमयी और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है माँ कामाख्या मंदिर, जो असम की राजधानी गुवाहाटी के […]
भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गया (Gaya, Bihar) का विशेष स्थान है। जहां एक ओर यह स्थान पिंडदान और मोक्ष के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह मंगला गौरी शक्तिपीठ (Mangala Gauri Shaktipeeth) के कारण भी अत्यंत पूजनीय है। यह वही स्थल है जहां मां सती का स्तन अंग गिरा था, और तभी से यहां शक्ति का अद्भुत रूप विराजमान है।
हर मंगलवार और विशेष रूप से नवरात्र के समय यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने मात्र से सुख-सौभाग्य, संतान सुख और मनोकामना की पूर्ति होती है।
ओडिशा के जाजपुर में स्थित बिरजा मंदिर (Biraja Temple) न केवल एक प्राचीन शक्तिपीठ है, बल्कि यह भारत का एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ भी है जहां पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है। यह मंदिर देवी सती के नाभि के स्थान पर बना हुआ है और इसे बिरजा क्षेत्र शक्तिपीठ (Biraja Kshetra Shakti Peeth) कहा जाता है।
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर सिर्फ अपने किले और संगीत परंपरा के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि यहां एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है जिसे देखने और दर्शन करने हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं — यह है अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achaleshwar Mahadev Temple, Gwalior)। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर धार्मिक आस्था, रहस्यमयी चमत्कारों और ऐतिहासिक महत्व का समागम है।
क्या आप जानते हैं? बाबा बैद्यनाथ धाम भारत का एकमात्र ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों का संगम है।
यहां रावण की घोर तपस्या, भगवान शिव की कृपा, सती का हृदयपात और चंद्रकांत मणि की अद्भुत महिमा — सभी का संगठित इतिहास छुपा है।
इस साल महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा इस बार का कुम्भ बहुत ही विशेष है। वैसे तो कुम्भ का आयोजन हर १२ वर्ष के बाद प्रयागराज में संगम तट पर होता है। लेकिन इस बार का कुम्भ सामान्य कुम्भ नहीं है। इस बार का कुम्भ महाकुम्भ है जो १४४ वर्षो में एक बार आयोजित किया जाता है। महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम है। यहां लाखों लोग पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं। मान्यता है कि इससे उनके पाप धुल जाते हैं और जीवन में सफलता मिलती है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में द्वतीय स्थान पर है। यह आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश पर्वत कहा गया है। महाभारत में दिए वर्णन के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के सामान फल प्राप्त होता है। माता पार्वती का नाम ‘मल्लिका’ है और भगवान शिव को ‘अर्जुन’ कहा जाता है। इस प्रकार सम्मिलित रूप से वे श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से यहाँ निवास करते है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग देवी का महाशक्तिपीठ भी है। यहाँ माता सती की ग्रीवा (गरदन या गला) गिरी थी।
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां हमेशा दर्शन करने वालों का तांता लगा रहता है। इन्हीं मंदिरों में शुमार
यह प्रसिद्ध तीर्थधाम ऐसी जगह पर स्थित है जहां अंटार्कटिका तक सोमनाथ समुद्र के बीच एक सीधी रेखा में भूमि को कोई भी हिस्सा नहीं है। यह तीर्थस्थल भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से पहला माना जाता है। इस मंदिर के निर्माण से कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि, इस मंदिर का निर्माण खुद चन्द्रदेव सोमराज ने किया था, जिसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है।
हमारे हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप