रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

नवरात्र पर उपवास रखे जाने का महत्व

आइये जानते वहीं की नवरात्र में व्रत क्यों रखे जाते हैं?

कुछ लोग पहले दिन और अष्टमी के दिन उपवास रखते हैं तो वहीं नवरात्र में कुछ लोग पूरे 9 दिन का उपवास करके मां दुर्गा की आराधना करते हैं। नवरात्र में उपवास रखने का विशेष महत्व है। देवी पूजा के साथ व्रत करके माता से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

1,391

आदिकाल से ही नवरात्र में उपवास रखने की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष शनिवार १७ अक्टूबर से नवरात्र प्रारम्भ हो रहा है जो २५ अक्टूबर रविवार के दिन समाप्तः हो जायेगा। नवरात्र में विधि-विधान से माता की पूजा के साथ व्रत भी रखा जाता है। कुछ लोग पहले दिन और अष्टमी के दिन उपवास रखते हैं तो वहीं नवरात्र में कुछ लोग पूरे 9 दिन का उपवास करके मां दुर्गा की आराधना करते हैं। नवरात्र में उपवास रखने का विशेष महत्व है। देवी पूजा के साथ व्रत करके माता से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

आइये जानते वहीं की नवरात्र में व्रत क्यों रखे जाते हैं?

१. आध्यात्मिक कारण

नवरात्र के समय ९ दिन तक माता के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है। माता के प्रत्येक स्वरूप की पूजा का अलग महत्व है। वस्तुतः इन ९ दिन में हम प्रत्येक दिन अध्यात्म की एक सीढ़ी चढ़ते जाते है। अपने तन तथा मन को पुनः ऊर्जा से भर लेना तथा स्थूल भौतिक संसार से सूक्ष्म आध्यात्मिक संसार की यात्रा का नाम ही नवरात्र हैं।

जब हम उपवास करते हैं तो ऐसे समय में हमारे शरीर की सभी इन्द्रियां इन कार्यों से विमुक्त होती हैं और शरीर अंतर्मुखी हो जाता है । इस अवस्था में हमें एक अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है।

२. स्वास्थ्य के लिए

दरअसल नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय पड़ते हैं। यह समय बर्षा के बाद शरद ऋतू के आगमन का होता है। ऐसे समय में बीमार होने की संभावना काफी अधिक होती है। लोगों को कई तरह के संक्रामक रोग भी हो जाते हैं। इसलिए नवरात्र के 9 दिन तक व्रत रखने से खानपान भी संतुलित होता है। व्रत से शरीर स्वस्थ बना रहता है। पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलता है। कब्ज, गैस, अपच आदि की समस्या से निजात मिल जाती है। व्रत रखने से मां की अनुकंपा मिलती है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान बढ़ने के साथ विचारों में भी पवित्रता आती है।

३. पौराणिक कारण

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मां आदि शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए स्वयं देवताओं ने भी नवरात्र के व्रत किए थे। माता की पूजा के कारण सभी को शुभ फल की प्राप्ति हुयी थी।

देवराज इंद्र ने राक्षस वृत्रासुर का वध करने के लिए मां दुर्गा की पूजा अर्चना की और नवरात्रि के व्रत रखे।
भगवान शिव ने त्रिपुरासुर दैत्य का वध करने के लिए मां भगवति का पूजन किया।
जग के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने मधु नाम के असुर का वध करने के लिए नवरात्र का व्रत किया था।
रावण का वध करने के लिए भगवान श्रीराम ने आश्विन नवरात्र का व्रत किया था।
देवी के व्रत से भगवान राम को वह अमोघ वाण प्राप्त हुआ था जिससे रावण मारा गया।
महाभारत में कौरवों पर विजय पाने के लिए पांडवों द्वारा देवी का व्रत करने का उल्लेख मिलता है।
देवी भागवत पुराण में राजा सुरथ की कथा मिलती है, जिन्हें नवरात्रि के व्रत रखने से अपना खोया हुआ राज्य और वैभव फिर से प्राप्त हुआ था।

अतः हमें भी यथा संभव नवरात्र के समय व्रत रख कर माता की पूजा आराधना करनी चाहिए।

सब्सक्राइब करें
सब्सक्राइब करें
यदि आप रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाओं को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो हमारे सदस्य बने। आप सिर्फ नीचे दिए हुए बॉक्‍स में अपना ई-मेल आईडी टाइप करके सबमिट कर दे। यह एकदम मुफ्त है।
आप कभी भी अपना नाम हटा सकते हैं।

टिप्पणियाँ बंद हैं।