रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

श्रावण मास, शिवजी को अर्पित करते हैं 15 तरह के फूल

श्रावण मास में भगवन शिव की पूजा का विशेष महत्व रहता है। भगवान् शिव की पूजा में कुछ विशेष प्रकार के फूल एवं फल चढ़ाये जाते हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि। आइये जानते हैं भगवान शिव को कौन कौनसे फूल और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।

488

श्रावण मास में भगवन शिव की पूजा का विशेष महत्व रहता है। भगवान् शिव की पूजा में कुछ विशेष प्रकार के फूल एवं फल चढ़ाये जाते हैं। शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि। आइये जानते हैं भगवान शिव को कौन कौनसे फूल और पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।

1. धतूरे के फूल
ऐसा माना जाता है कि धतूरे का फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है और मन की कड़वाहट भगवान् शिव दूर करते हैं। इस फूल को शिवलिंग पर चढ़ाने के सकारात्मक प्रभाव की वजह से मन प्रसन्न रहता है और भक्तों को उनकी पूजा का विशेष फल मिलता है। संतान प्राप्त के लिए धतूरा अर्पित करना होता।

नागकेसर के सफेद पुष्प

2. हरसिंगार के फूल

महाशिवरात्रि के दिन हरसिंगार के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से सुख और संपत्ति में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि हरसिंगार के फूलों से घर का वास्तु भी ठीक होता है। इनकी महक से घर में सकारात्मक ऊर्जा भी आती है। साथ ही यदि भगवान शिव के पूजन में दूर्वा का इस्तेमाल किया जाए तो मनुष्य की आयु बढ़ती है।

हरसिंगार के फूल

3. नागकेसर के सफेद पुष्प

नागकेसर को नागपुष्प, पुष्परेचन, पिंजर, कांचन, फणिकेसर, स्वरघातन के नाम से जाना जाता है। इसका रंग पीला होता है। नागकेसर खाने में कषैला, रूखा और हल्का होता है। यह एक पेड़ का फूल है। इसकी सुगंध तेज होती है। तंत्र क्रियाओं में कई प्रकार की वनस्पतियों का उपयोग किया जाता है, नागकेसर के फूल भी इनमें से एक है। तंत्र क्रियाओं में नागकेसर को बहुत ही शुभ वनस्पति माना गया है। तंत्र के अनुसार नागकेसर एक धनदायक फूल है।

4. सूखे कमल गट्टे

सूखे कमल गट्टे

5. कनेर के फूल

हिंदू धर्म हो या फिर औषधी शास्त्र, यहां पर कनेर फूल का अलग ही महत्व होता है सोमवार की पूजा में जहां पर शिवजी के प्रिय फूलों में से एक कनेर होता है वहीं सावन के पावन महीने में इसे चढ़ाने से आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव मिलते है। कनेर का फूल चढ़ाने से वस्त्र आभूषणों की प्राप्ति होती है।

कनेर के फूल

6. कुसुम के फूल

कुसुम के फूल

7. आंकड़े के फूल

शिव जी का पसंदीदा रंग सफेद है इसलिए उनकी पूजा में सफेद आक के फूल जरुर चढ़ाना चाहिए. इसे, आंकड़ा, अर्क और अकौआ के नाम से भी जाना जाता है. भगवान भोलेनाथ को सावन में ये फूल अर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के मुताबिक शिव पूजा में एक आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के बराबर फल देता है।

आंकड़े के फूल

8. कुश के फूल

कुश के फूल

9. गेंदे के फूल

अगर आप भगवान को पीले रंग का गेंदा का फूल चढ़ाएंगे तो आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। इतना ही नहीं, अगर आप सोमवार के दिन शिवजी को फूल चढ़ाएंगे तो आपके घर खुशियां ही खुशियां आएंगी और सारी मुसीबतें दूर होंगी। इसके अलावा भगवान शिवजी की कृपा भी बरसेगी और घर में कलह भी नहीं होगी।

गेंदे के फूल

10. गुलाब के फूल

सभी देवी देवताओं को गुलाब के फूल अत्यंत प्रिय हैं। देवी लक्ष्मी को प्रत्येक शुक्रवार को गुलाब अर्पित करने से धन समृद्धि मिलती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को गुलाब का फूल अर्पित करने से व्यक्ति की सेहत अच्छी रहती है साथ ही आयु लंबी और खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है।

गुलाब के फूल

11. शंख पुष्पी का फूल

धन प्राप्ति का वरदान पाने के लिए भोलेनाथ को सावन में कमल का फूल अर्पित करें. महादवे की पूजा में सफेद कमल चढ़ाना उत्तम होता है. आर्थिक संकट दूर होता है। धन लाभ के लिए शिव जी को शंख पुष्पी और बिल्वपत्र भी चढ़ाएं। कमल का फूल, बिल्वपत्र और शंख पुष्पी चढ़ाने से धनलाभ होता है।

शंख पुष्पी का फूल

12. बेला के फूल

शिवजी को बेला का फूल अति प्रिय है। बेला का फूल भगवान् शिव को अर्पित करने से विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि बेले के फूल से शिवजी की पूजा करने से सुंदर-सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। बेला का फूल चढ़ाने से विवाह की समस्या दूर होती है।

बेला के फूल

13. चमेली का फूल

भगवान शिव को सावन में चमेली चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है, ऐसी मान्यता है कि शिवजी को चमेली का फूल चढ़ाने से वाहन सुख मिलता है।

चमेली का फूल

14. शेफालिका का फूल

ऐसी मान्यता है कि संतान प्राप्ति के लिए शिव को लाल या सामान्य धतुरा व तनाव दूर करने के लिए शेफालिका का फूल अर्पित करना चाहिए। मालूम हो कि मान-सम्मान पाने के लिए भी भगवान शंकर के प्रिय पुष्प बताए गए हैं। कहते हैं कि सावन के महीने में शिव जी को आगस्त्य का फूल चढ़ाने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। तनाव दूर करने के लिए शेफालिका का फूल अर्पित करना चाहिए।

15. आगस्त्य
आगस्त्य का फूल चढ़ाने से मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

आगस्त्य

शिव पूजन में प्रयोग होने वाली प्रमुख सामग्री

1.जल – जल अर्पित करने से मन शांत होता है।
2.दूध – दूध अर्पित करने से सेहत में लाभ होता है।
3.दही – दही अर्पित करने से स्वभाव में सुधार होता है।
4.शहद – शहद अर्पित करने से वाणी में मिठास आती है।
5.घी – घी अर्पित करने से शक्ति बढ़ती है।
6. शक्कर – शक्कर अर्पित करने से सुख और समृद्धि बढ़ती है।
7.ईत्र – ईत्र अर्पित करने से विचार और भाव पवित्र होते हैं।
8.चंदन – चन्दन अर्पित करने से मान सम्मान प्राप्त होता है।
9.केसर – केसर अर्पित करने से सौम्यता प्राप्त होती है।

शिव जी पूजा में निम्नलिखित वस्तुओं का प्रयोग नहीं किया जाता ।

  1. हल्दी: हल्दी खानपान का स्वाद तो बढ़ाती है साथ ही धार्मिक कार्यों में भी हल्दी का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। लेकिन शिवजी की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। हल्दी उपयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन में किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसी वजह से महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती।
  2. लाल रंग के फूल: शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं। शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है।
  3. कुमकुम या रोली: शास्त्रों के अनुसार शिव जी को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है।
  4. शिव पूजा में वर्जित है शंख: शंख भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय हैं लेकिन शिव जी ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था इसलिए शंख भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है।
  5. नारियल पानी: नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं करना चाहिए क्योंकि नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है इसलिए सभी शुभ कार्य में नारियल का प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया जाता है। लेकिन शिव पर अर्पित होने के बाद नारियल पानी ग्रहण योग्य नहीं रह जाता है।
  6. तुलसी दल: तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए। इस संदर्भ में असुर राज जलंधर की कथा है जिसकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी। शिव जी ने जलंधर का वध किया था इसलिए वृंदा ने भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करने की बात कही थी।
सब्सक्राइब करें
सब्सक्राइब करें
यदि आप रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाओं को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो हमारे सदस्य बने। आप सिर्फ नीचे दिए हुए बॉक्‍स में अपना ई-मेल आईडी टाइप करके सबमिट कर दे। यह एकदम मुफ्त है।
आप कभी भी अपना नाम हटा सकते हैं।

टिप्पणियाँ बंद हैं।