रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 6 — शिला का स्त्री होना, पर्वतों का तैरना, मृतक का जीना; सभी कल्याण सुलभ होने का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का छठा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।
तीन असंभव कार्यों का दृष्टांत — सभी कल्याण सरलता से प्राप्त होंगे।
मूल दोहा: सिला सुतिया भइ गिरि तरे मृतक जिए जग जान। राम अनुग्रहँ सगुन सुभ, सुलभ सकल कल्यान॥६॥
शब्दार्थ:
- सिला = पत्थर (अहल्या)
- सुतिया भइ = सुंदरी स्त्री हो गई
- गिरि तरे = पर्वत तैरने लगे
- मृतक जिए = मृतक जी उठा
- जग जान = संसार जानता है
- राम अनुग्रहँ = श्रीराम की कृपा से
- सुलभ = सरलता से
- सकल कल्यान = सभी कल्याण
सिला सुतिया भइ, गिरि तरे, मृतक जिए जग जान = पत्थर स्त्री हो गया, पर्वत तैरे, मृतक जी उठा — संसार जानता है। सुलभ सकल कल्यान = सभी कल्याण सरलता से प्राप्त होंगे।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम की कृपा से पत्थर रूपी अहल्या सुंदरी स्त्री हो गई, पर्वत समुद्र पर तैरने लगे और मृतक बालक जी उठा — यह संसार जानता है।
तुलसीदास जी तीन ऐसे उदाहरण देते हैं जो प्रकृति के नियमों के विरुद्ध हैं — पत्थर का जीवित होना, पर्वत का तैरना और मृतक का जी उठना।
उनका तर्क सीधा है — जब ये तीनों असंभव कार्य हो सकते हैं, तो आपकी समस्या क्या बड़ी है? इसीलिए वे कहते हैं कि सभी कल्याण सरलता से प्राप्त होंगे। शकुन की दृष्टि से यह दोहा निराश प्रश्नकर्ताओं के लिए सर्वाधिक आशाजनक है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है — सभी कल्याण सरलता से प्राप्त होंगे। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- ऐसी समस्या जो असंभव लग रही हो
- लंबे समय से अटका हुआ कोई कार्य
- पूरी तरह निराश कर देने वाली स्थिति
- स्वास्थ्य, संबंध या धन का बड़ा संकट
- किसी चमत्कारिक बदलाव की आशा
इस दोहे के आने पर सभी कल्याण सरलता से मिलेंगे। जब पत्थर जीवित हो सकता है और पर्वत तैर सकते हैं, तो आपकी समस्या कैसे बड़ी हो सकती है — निराशा पूरी तरह त्याग दें।
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