रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 7 — पूरे ग्रंथ का अंतिम 343वाँ दोहा; गुण-विश्वास रूपी मणियों का शकुन-हार और निर्मल विचार की महिमा।

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प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। सप्तम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें सातवाँ दोहा — यह सर्ग पूरे ग्रंथ के प्रयोग की कुंजी माना जाता है।

यह पूरे रामाज्ञा प्रश्न का अंतिम, 343वाँ दोहा है — ग्रंथ का समापन।

मूल दोहा: गुन बिस्वास बिचित्र मनि, सगुन मनोहर हारु। तुलसी रघुबर भगत उर, बिलसत बिमल बिचारु॥७॥

शब्दार्थ:

  • गुन = गुण
  • बिस्वास = विश्वास
  • बिचित्र मनि = विचित्र मणि, अद्भुत रत्न
  • सगुन = शकुन
  • मनोहर हारु = मनोहर हार
  • रघुबर भगत उर = श्रीराम के भक्त के हृदय में
  • बिलसत = शोभित होता है
  • बिमल बिचारु = निर्मल विचार

गुन बिस्वास बिचित्र मनि, सगुन मनोहर हारु = गुण और विश्वास अद्भुत मणियाँ हैं और शकुन मनोहर हार है। तुलसी रघुबर भगत उर, बिलसत बिमल बिचारु = श्रीराम के भक्त के हृदय में निर्मल विचार शोभित होता है।

भावार्थ / व्याख्या:

यह पूरे रामाज्ञा प्रश्न का अंतिम दोहा है — सात सर्ग, उनचास सप्तक और तीन सौ तैंतालीस दोहों का समापन।

तुलसीदास जी एक सुंदर रूपक से ग्रंथ पूरा करते हैं — गुण और विश्वास अद्भुत मणियाँ हैं तथा शकुन उन मणियों से बना मनोहर हार है। और यह हार श्रीराम के भक्त के हृदय में निर्मल विचार बनकर शोभित होता है।

इस रूपक का अर्थ गहरा है। मणि अकेली सुंदर होती है, पर हार तब बनता है जब वे एक सूत्र में पिरो दी जाएँ। इसी प्रकार गुण और विश्वास अलग-अलग भी मूल्यवान हैं, परंतु जब वे श्रद्धा के सूत्र में पिरोए जाते हैं, तब शकुन का सच्चा फल मिलता है। पूरे ग्रंथ का निष्कर्ष यही है — निर्मल हृदय ही सबसे बड़ा शकुन है।

शकुन फल:

यह ग्रंथ का अंतिम दोहा है और निर्मल विचार की महिमा बताता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • किसी कार्य में मन और नीयत की शुद्धता
  • गुण और विश्वास से बनने वाला परिणाम
  • भक्ति, श्रद्धा और आंतरिक निर्मलता
  • किसी अध्याय का शुभ समापन
  • कोई भी कार्य — सभी प्रकार के प्रश्न

इस अंतिम दोहे के आने पर स्मरण रखें — निर्मल हृदय ही सबसे बड़ा शकुन है। गुण और विश्वास दो मणियाँ हैं, श्रद्धा उनका सूत्र है।

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