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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 3 — शकुन की सत्यता और गणना-विधि; प्रीति और प्रतीति को ही प्रमाण बताने वाला दोहा।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। सप्तम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें तीसरा दोहा — यह सर्ग पूरे ग्रंथ के प्रयोग की कुंजी माना जाता है।

शकुन सत्य है — प्रेम और विश्वास ही उसका प्रमाण है।

मूल दोहा: सगुन सत्य ससि नयन गुन, अवधि अधिक नयवान। होइ सुफल सुभ जासु जसु, प्रीति प्रतीति प्रमान॥३॥

शब्दार्थ:

  • सगुन सत्य = शकुन सत्य है
  • ससि = शशि, चन्द्रमा — संख्या एक
  • नयन = नेत्र — संख्या दो
  • गुन = गुण — संख्या तीन
  • अवधि = अवधि, सीमा
  • अधिक नयवान = अधिक नीतियुक्त
  • सुफल सुभ = शुभ और सफल
  • जासु जसु = जिसका यश
  • प्रीति प्रतीति प्रमान = प्रेम और विश्वास ही प्रमाण

सगुन सत्य ससि नयन गुन = शकुन सत्य है — शशि (एक), नयन (दो), गुण (तीन) की गणना से। होइ सुफल सुभ जासु जसु, प्रीति प्रतीति प्रमान = जिसका प्रेम और विश्वास हो, उसी के लिए यह सफल और शुभ होता है — यही प्रमाण है।

भावार्थ / व्याख्या:

इस दोहे में तुलसीदास जी संख्या-सूचक शब्दों का प्रयोग करते हैं — शशि अर्थात् चन्द्रमा एक होता है, नयन दो होते हैं और गुण तीन होते हैं। यह गणना की विधि का संकेत है।

परंतु दोहे का मूल संदेश अंतिम पंक्ति में है — ‘प्रीति प्रतीति प्रमान’, अर्थात् प्रेम और विश्वास ही इसका प्रमाण हैं।

यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात है। तुलसीदास जी कह रहे हैं कि यह ग्रंथ किसी यंत्र की तरह काम नहीं करता। जिसके मन में श्रद्धा और विश्वास है, उसी के लिए यह शुभ और सफल होता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा बताता है कि आपकी श्रद्धा ही आपका फल तय करती है।

शकुन फल:

यह शकुन सत्य है और श्रद्धा ही इसका प्रमाण है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • शकुन या संकेत की सत्यता का प्रश्न
  • श्रद्धा और विश्वास की भूमिका
  • किसी विधि या पद्धति पर भरोसा
  • यश और सफलता से जुड़ा प्रश्न
  • संदेह और विश्वास के बीच की स्थिति

इस दोहे के आने पर स्मरण रखें — शकुन सत्य है, पर उसका फल आपकी श्रद्धा पर निर्भर है। प्रेम और विश्वास ही इसका प्रमाण है।

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