रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 7 — केवट, विभीषण, जटायु और वानरों को श्रीराम द्वारा सत्पुरुष बनाना; मंगलों की खान कहा गया शकुन।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का सातवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।
केवट, राक्षस, पक्षी और पशु का उद्धार — यह शकुन मंगलों की खान है।
मूल दोहा: केवट निसिचर बिहँग मृग किए साधु सनमानि। तुलसी रघुबर की कृपा सगुन सुमंगल खानि॥७॥
शब्दार्थ:
- केवट = निषादराज गुह
- निसिचर = राक्षस (विभीषण)
- बिहँग = पक्षी (जटायु)
- मृग = पशु (वानर)
- किए साधु = सत्पुरुष बना दिया
- सनमानि = आदर देकर
- रघुबर की कृपा = श्रीरघुनाथजी की कृपा
- सुमंगल खानि = मंगलों की खान
केवट निसिचर बिहँग मृग किए साधु सनमानि = केवट, राक्षस, पक्षी और पशुओं को आदर देकर सत्पुरुष बना दिया। सगुन सुमंगल खानि = यह शकुन मंगलों की खान है।
भावार्थ / व्याख्या:
केवट निषादराज गुह, राक्षस विभीषण, पक्षी जटायु एवं पशु वानरों को श्रीरघुनाथजी ने कृपा करके आदर देकर सत्पुरुष बना दिया।
इस दोहे में समाज के चार ऐसे वर्गों का उल्लेख है जिन्हें उस युग में सम्मान नहीं मिलता था। श्रीराम ने चारों को गले लगाया और इतिहास में अमर कर दिया।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन उत्तम मंगलों की खान है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नकर्ताओं के लिए विशेष है जो स्वयं को छोटा, अयोग्य या उपेक्षित समझते हैं — यह बताता है कि आपकी योग्यता जन्म से नहीं, कर्म और श्रद्धा से तय होगी।
शकुन फल:
यह शकुन उत्तम मंगलों की खान है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- साधारण स्थिति से ऊपर उठने का अवसर
- उपेक्षित या अनदेखे व्यक्ति को मिलने वाला सम्मान
- योग्यता के आधार पर मिलने वाली पहचान
- किसी की सहायता या उद्धार करने का कार्य
- भेदभाव मिटाकर सबको साथ लेना
इस दोहे के आने पर मंगलों की खान का संकेत है। स्वयं को छोटा न समझें — योग्यता जन्म से नहीं, कर्म और श्रद्धा से तय होती है।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।