रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 3 — शत्रुघ्नजी के चरण-स्मरण से कीर्ति, विजय और भूमि-ग्राम-गृह के लाभ का शुभ शकुन।

3

शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। यह दोहा षष्ठम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से तीसरा है — यहाँ प्रेम, धर्म और मर्यादा के भाव प्रमुख हैं।

शत्रुघ्नजी के चरण — कीर्ति, विजय, भूमि, ग्राम और घर का लाभ।

मूल दोहा: ललित लखन लघु बंधु पद सुखद सगुन सब काहु। सुमिरत सुभ कीरति बिजय, भूमि ग्राम गृह लाहु॥३॥

शब्दार्थ:

  • ललित = सुंदर
  • लघु बंधु = छोटे भाई (शत्रुघ्नजी)
  • पद = चरण
  • सुखद = सुखदायी
  • सब काहु = सबके लिए
  • कीरति = कीर्ति
  • बिजय = विजय
  • भूमि ग्राम गृह = भूमि, गाँव और घर
  • लाहु = लाभ

ललित लखन लघु बंधु पद सुखद सगुन सब काहु = लक्ष्मणजी के छोटे भाई शत्रुघ्नजी के चरण सबके लिए सुखदायी हैं। भूमि ग्राम गृह लाहु = भूमि, गाँव और घर का लाभ होगा।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीलक्ष्मणजी के छोटे भाई शत्रुघ्नजी के सुंदर चरण स्मरण करने पर सबके लिए सुखदायी हैं।

तुलसीदास जी इसका फल विस्तार से बताते हैं — यह शकुन शुभ है और इससे कीर्ति, विजय, भूमि, ग्राम तथा घर का लाभ होगा।

ध्यान देने योग्य है कि यहाँ अचल संपत्ति का विशेष उल्लेख है — भूमि, गाँव और घर। रामायण में शत्रुघ्नजी ने ही मथुरा जीतकर वहाँ नगर बसाया था। शकुन की दृष्टि से यह दोहा संपत्ति और भूमि से जुड़े प्रश्नों में सर्वाधिक अनुकूल है।

शकुन फल:

यह शकुन शुभ है और भूमि-संपत्ति के लाभ का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • भूमि, प्लॉट या खेत की खरीद
  • घर, मकान या दुकान की प्राप्ति
  • अचल संपत्ति से जुड़ा कोई सौदा
  • नाम, यश और विजय
  • नए स्थान पर बसना या निर्माण करना

इस दोहे के आने पर शकुन शुभ है। भूमि, गाँव और घर का लाभ होगा — संपत्ति संबंधी कार्य में आगे बढ़ें।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।