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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 4

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 4 — श्रीराम द्वारा ब्राह्मण-बालक का जीवित किया जाना; ‘रोगी नहाकर उठ खड़ा होगा’ का शुभ शकुन।

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इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का चौथा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।

बालक का जीवित होना — रोगी नहाकर उठ खड़ा होगा।

मूल दोहा: कोसल पाल कृपाल चित बालक दीन्ह जिआइ। सगुन कुसल कल्यान सुभ, रोगी उठै नहाइ॥४॥

शब्दार्थ:

  • कोसल पाल = कोसलनाथ
  • कृपाल चित = दयालु हृदय
  • बालक = बालक
  • दीन्ह जिआइ = जीवित कर दिया
  • सगुन कुसल = कुशल शकुन
  • कल्यान = कल्याण
  • रोगी = रोगी
  • उठै नहाइ = नहाकर उठ खड़ा होगा

कोसल पाल कृपाल चित बालक दीन्ह जिआइ = दयालु हृदय कोसलनाथ ने बालक को जीवित कर दिया। रोगी उठै नहाइ = रोगी नहाकर उठ खड़ा होगा।

भावार्थ / व्याख्या:

दयालु हृदय श्रीकोसलनाथ रघुनाथजी ने ब्राह्मण के बालक को जीवित कर दिया। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन शुभ है और कुशल एवं कल्याण का सूचक है — रोगी नहाकर उठ खड़ा होगा।

‘रोगी उठै नहाइ’ अत्यंत सुंदर और सजीव पद है। रोगी का नहाना स्वस्थ होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है — जब तक बीमारी रहती है, स्नान भी नहीं हो पाता।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा रोग-निवृत्ति के प्रश्नों में रामाज्ञा प्रश्न का सबसे स्पष्ट और आश्वस्तकारी उत्तर है। यह न केवल स्वस्थ होने, बल्कि पूर्ण स्वस्थ होकर उठ खड़े होने का संकेत देता है।

शकुन फल:

यह शकुन शुभ है — रोगी नहाकर उठ खड़ा होगा। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • रोग या गंभीर बीमारी से मुक्ति
  • किसी अस्वस्थ व्यक्ति के स्वस्थ होने का प्रश्न
  • शल्य-क्रिया या उपचार का परिणाम
  • लंबी बीमारी के बाद पूर्ण स्वास्थ्य
  • संतान के स्वास्थ्य की चिंता

इस दोहे के आने पर रोगी पूर्ण स्वस्थ होकर उठ खड़ा होगा। यह रोग-निवृत्ति का सबसे स्पष्ट शुभ संकेत है — चिंता त्यागें।

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