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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 5 — जीवित बालक को देख ‘मानो सोकर उठा हो’ की उपमा; शोक दूर करने वाला शुभ शकुन।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। षष्ठम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पाँचवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें राज्य, यश और गृहस्थ-सुख के शकुन देखे जाते हैं।

मानो सोकर उठा हो — यह शुभ शकुन शोक दूर करने वाला है।

मूल दोहा: बालकु जिया बिलोकि सब कहत उठा जनु सोइ। सोच बिमोचन सगुन सुभ, राम कृपाँ भल होइ॥५॥

शब्दार्थ:

  • बालकु जिया = बालक जीवित हुआ
  • बिलोकि = देखकर
  • कहत = कहने लगे
  • उठा जनु सोइ = मानो सोकर उठा हो
  • सोच बिमोचन = शोक को दूर करने वाला
  • राम कृपाँ = श्रीराम की कृपा से
  • भल होइ = भला होगा

बालकु जिया बिलोकि सब कहत उठा जनु सोइ = बालक को जीवित देख सब कहने लगे, मानो यह सोकर उठा है। सोच बिमोचन सगुन सुभ = यह शुभ शकुन शोक दूर करने वाला है।

भावार्थ / व्याख्या:

ब्राह्मण के बालक को जीवित हो उठा देखकर सब कहने लगे — मानो यह सोकर उठा है। यह उपमा अत्यंत कोमल है। मृत्यु से लौटना ऐसा लग रहा था जैसे कोई नींद से जागा हो।

तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शुभ शकुन शोक को दूर करने वाला है और श्रीराम की कृपा से भलाई होगी।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी बड़े शोक या हानि के बाद स्थिति सामान्य होने की आशा हो। संदेश यह है कि जो कठिनाई असाध्य लग रही थी, वह इतनी सहजता से हल होगी मानो कुछ हुआ ही न हो।

शकुन फल:

यह शुभ शकुन शोक दूर करने वाला है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • किसी बड़े शोक या दुःख से उबरना
  • असाध्य लगने वाली समस्या का सहज समाधान
  • बीमारी के बाद सामान्य जीवन की वापसी
  • हानि के बाद स्थिति का पुनः संभलना
  • श्रीराम की कृपा से मिलने वाली राहत

इस दोहे के आने पर शोक दूर होगा। जो कठिनाई असाध्य लग रही थी, वह इतनी सहजता से हल होगी मानो कुछ हुआ ही न हो।

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