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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 3 — उजड़ी अयोध्या और माताओं की दुःखभरी दशा; प्रियजनों के दुःख से शोक का शकुन।

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शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। प्रस्तुत दोहा षष्ठम सर्ग के दूसरे सप्तक में तीसरा स्थान पर है, जहाँ पुनर्मिलन और कुशल-क्षेम के शुभ संकेत मिलते हैं।

उजड़ी अयोध्या और माताओं की दशा — प्रियजनों के दुःख से शोक।

मूल दोहा: उदबस अवध अनाथ सब अंब दसा दुख देखि। रामु लखनु सीता सकल बिकल बिषाद बिसेषि॥३॥

शब्दार्थ:

  • उदबस = उजाड़, वीरान
  • अनाथ = अनाथ
  • अंब = माताएँ
  • दसा = दशा
  • दुख देखि = दुःख देखकर
  • बिकल = व्याकुल
  • बिषाद = शोक
  • बिसेषि = अत्यधिक

उदबस अवध अनाथ सब अंब दसा दुख देखि = उजाड़ अनाथ अयोध्या और माताओं की दुःखभरी दशा देखकर। बिकल बिषाद बिसेषि = सभी व्याकुल हो गए, बहुत दुःख हुआ।

भावार्थ / व्याख्या:

अयोध्या को अनाथ तथा उजाड़ और सभी माताओं की दुःखभरी दशा देखकर श्रीराम, लक्ष्मण और जानकीजी — सभी व्याकुल हो गए और उन्हें बहुत दुःख हुआ।

विजय का आनंद यहाँ ठहर जाता है। लौटने पर जो दृश्य मिला वह वैसा नहीं था जैसा छोड़कर गए थे — पिता नहीं रहे, माताएँ शोक में सूख गई थीं।

तुलसीदास जी इसका शकुन-फल बताते हैं — प्रियजनों के दुःख से शोक होगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में सावधानी का संकेत देता है जहाँ लंबी अनुपस्थिति के बाद वापसी हो, या परिवार की स्थिति चिंता का विषय हो।

शकुन फल:

यह शकुन प्रियजनों के दुःख से शोक का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • लंबी अनुपस्थिति के बाद बदली हुई स्थिति
  • परिवार या माता-पिता की दशा की चिंता
  • अपनों के कष्ट से होने वाला मानसिक दुःख
  • घर या संपत्ति की उपेक्षित स्थिति
  • सफलता के बीच आने वाला व्यक्तिगत शोक

इस दोहे के आने पर प्रियजनों के दुःख से शोक की सूचना है। अपने परिवार, विशेषकर बुज़ुर्गों का हाल लें और उन्हें समय दें।

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