रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 2 — लंका के बाज़ार-घाटों में रावण के विनाश की अमंगल चर्चा; यह प्रश्न-फल अशुभ है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ तुलसीदास जी की उन रचनाओं में गिना जाता है जो भक्ति के साथ-साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देती हैं। इस छठे सप्तक के दूसरा दोहे में पंचम सर्ग का वह भाव है जो कहता है — प्रयत्न मत छोड़ो, मार्ग निकल आएगा।
लंका में अमंगल-चर्चा — यह प्रश्न-फल अशुभ है।
मूल दोहा: लंक असुभ चरचा चलति हाट बाट घर घाट। रावन सहित समाज अब जाइहि बारह बाट॥२॥
शब्दार्थ:
- लंक = लंका
- असुभ चरचा = अमंगल चर्चा
- चलति = चलती है
- हाट = बाज़ार
- बाट = मार्ग
- घाट = घाट
- सहित समाज = अपने समाज सहित
- जाइहि = नष्ट हो जाएगा
- बारह बाट = बारह रास्ते, तितर-बितर
लंक असुभ चरचा चलति हाट बाट घर घाट = लंका के बाज़ार, मार्ग, घर और घाटों पर अमंगल चर्चा चल रही है। जाइहि बारह बाट = समाज सहित नष्ट हो जाएगा।
भावार्थ / व्याख्या:
लंका के बाज़ारों में, मार्गों पर, घरों में तथा घाटों पर यही अमंगल-चर्चा होती रहती है कि अब समाज के साथ रावण नष्ट हो जाएगा।
यह जनमत का चित्र है। जब किसी शासक या संस्था के विरुद्ध सर्वत्र ऐसी चर्चा होने लगे, तो समझना चाहिए कि पतन निकट है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘अशुभ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ किसी व्यक्ति, व्यवसाय या संस्था के बारे में सर्वत्र नकारात्मक चर्चा हो रही हो। ऐसी चर्चा को अनदेखा करना भारी पड़ता है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:
- अपने या व्यवसाय के विरुद्ध फैली नकारात्मक चर्चा
- प्रतिष्ठा या साख को होने वाली हानि
- लोगों का विश्वास टूटना
- किसी संस्था या नेतृत्व का गिरता भरोसा
- अफवाह या बदनामी की स्थिति
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। जो नकारात्मक चर्चा हो रही है उसे अनदेखा न करें — कारण खोजें और तुरंत सुधार करें।
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