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रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 3 — लंका में उल्कापात, दिशा-दाह, धूमकेतु और भूकंप के अपशकुन; महान अनर्थ का सूचक।

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शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। इस छठे सप्तक के तीसरा दोहे में पंचम सर्ग का वह भाव है जो कहता है — प्रयत्न मत छोड़ो, मार्ग निकल आएगा।

उल्कापात, भूकंप और अपशकुन — महान अनर्थ का सूचक।

मूल दोहा: ऊकपात दिकादाह दिन, फेकरहिं स्वान सियार। उदित केतु गतहेतु महि कंपाति बारहि बार॥३॥

शब्दार्थ:

  • ऊकपात = उल्कापात
  • दिकादाह = दिशाओं में अग्निदाह
  • फेकरहिं = रोते हैं
  • स्वान सियार = कुत्ते और सियार
  • उदित केतु = धूमकेतु का उगना
  • गतहेतु = स्वार्थ का नाशक
  • महि कंपाति = पृथ्वी काँपती है
  • बारहि बार = बार-बार

ऊकपात दिकादाह दिन = दिन में ही उल्कापात और दिशा-दाह होता है। महि कंपाति बारहि बार = बार-बार पृथ्वी काँपती है।

भावार्थ / व्याख्या:

लंका में दिन में ही उल्कापात होता है, दिशाओं में अग्निदाह होता है, कुत्ते और सियार रोते हैं, स्वार्थ का नाशक धूमकेतु उगता है और बार-बार पृथ्वी काँपती है।

यह रामाज्ञा प्रश्न का सबसे विस्तृत अपशकुन-वर्णन है। एक ही दोहे में पाँच प्रकार के अपशकुन गिनाए गए हैं — आकाशीय, दिशा-संबंधी, पशु-संबंधी, ग्रह-संबंधी और भूमि-संबंधी।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘महान अनर्थ का सूचक’ कहते हैं, जो रामाज्ञा प्रश्न की सबसे गंभीर चेतावनी है। शकुन की दृष्टि से इस दोहे के आने पर कोई भी नया कार्य, यात्रा या निवेश पूर्णतः स्थगित कर देना चाहिए।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल महान अनर्थ का सूचक है। निम्नलिखित सभी प्रश्नों में स्थगन उचित:

  • कोई भी नया कार्य, निवेश या आरंभ
  • यात्रा या स्थान परिवर्तन
  • बड़ा आर्थिक निर्णय या सौदा
  • स्वास्थ्य, दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा
  • किसी विवाद या टकराव में उतरना

इस दोहे के आने पर महान अनर्थ की चेतावनी है। हर प्रकार का नया कार्य पूर्णतः स्थगित करें, सुरक्षा का ध्यान रखें और समय बदलने की प्रतीक्षा करें। श्रीराम का स्मरण और सत्कर्म ही इस काल में सहारा है।

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