रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 4 — सेवकपाल और सूर्यवंश-कुमुदिनी के चन्द्रमा श्रीराम का स्मरण; पद-पद पर परमानंद का शकुन।
सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। यह दोहा पंचम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से चौथा है — यहाँ भक्ति, बल और बुद्धि तीनों का संयोग है।
सेवकपाल श्रीराम का स्मरण — पद-पद पर परमानंद।
मूल दोहा: सेवकपाल कृपाल चित रबि कुल कैरव चंद। सुमिरि करहु सब काज सुभ, पग पग परमानंद॥४॥
शब्दार्थ:
- सेवकपाल = सेवकों की रक्षा करने वाले
- कृपाल चित = दयालु हृदय
- रबि कुल = सूर्यवंश
- कैरव = कुमुदिनी
- चंद = चन्द्रमा
- सुमिरि = स्मरण करके
- पग पग = पद-पद पर
- परमानंद = परम आनंद
सेवकपाल कृपाल चित, रबि कुल कैरव चंद = सेवकों के रक्षक, दयालु हृदय, सूर्यवंश रूपी कुमुदिनी के चन्द्रमा। पग पग परमानंद = पद-पद पर परम आनंद होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
सेवकों की रक्षा करने वाले, दयालु हृदय, सूर्यवंश रूपी कुमुदिनी के लिए आह्लादकारी चन्द्रमा के समान श्रीरघुनाथजी का स्मरण करके सब काम करो। परिणाम में शुभ होगा और पद-पद पर सदा परम आनंद होगा।
कुमुदिनी और चन्द्रमा का रूपक सुंदर है। कुमुदिनी चन्द्रमा के उदय होते ही खिल उठती है — बिना उसके वह मुरझाई रहती है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ किसी बड़े या स्वामी के संरक्षण की आवश्यकता हो। ‘पग पग परमानंद’ का अर्थ है कि आनंद एक बार नहीं, हर कदम पर मिलेगा।
शकुन फल:
यह शकुन पद-पद पर परम आनंद का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी बड़े या स्वामी के संरक्षण की आवश्यकता
- कोई भी कार्य आरंभ करने का निर्णय
- निरंतर सुख और आनंद की स्थिति
- सेवा या अधीनस्थ भूमिका से जुड़ा प्रश्न
- कुल, वंश या परिवार की प्रतिष्ठा
इस दोहे के आने पर पद-पद पर परम आनंद का संकेत है। श्रीराम का स्मरण करके कार्य आरंभ करें — परिणाम शुभ होगा।
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