रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 5 — सीताजी के चरण-स्मरण से स्त्रियों को सौभाग्य, बड़ा भाग्य, पुत्र-प्राप्ति और कल्याण का शकुन।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। यह दोहा पंचम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पाँचवाँ है — यहाँ भक्ति, बल और बुद्धि तीनों का संयोग है।
सीताजी के चरण-स्मरण से सौभाग्य और पुत्र-प्राप्ति।
मूल दोहा: सिय पद सुमिरि सुतीय हित सगुन सुमंगल जानु। स्वामि सोहागिल भाग बड़ पुत्र काजु कल्यानु॥५॥
शब्दार्थ:
- सिय पद = सीताजी के चरण
- सुतीय हित = उत्तम स्त्रियों के लिए
- स्वामि सोहागिल = स्वामी का सौभाग्य, सौभाग्यवती
- भाग बड़ = बड़ा भाग्य
- पुत्र काजु = पुत्र-प्राप्ति
- कल्यानु = कल्याण
सिय पद सुमिरि सुतीय हित = उत्तम स्त्रियों के लिए सीताजी के चरणों का स्मरण। स्वामि सोहागिल भाग बड़, पुत्र काजु कल्यानु = सौभाग्य, बड़ा भाग्य, पुत्र-प्राप्ति और कल्याण होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
उत्तम स्त्रियों के लिए श्रीजानकीजी के चरणों का स्मरण रूपी शकुन परम मंगलकारी समझो।
इसका फल भी स्पष्ट है — सौभाग्यवती रहेंगी, बड़ा भाग्य होगा, पुत्र-प्राप्ति होगी तथा कल्याण होगा।
यह दोहा रामाज्ञा प्रश्न के उन गिने-चुने दोहों में है जो विशेष रूप से स्त्रियों के लिए हैं और चार-चार फल एक साथ बताते हैं। शकुन की दृष्टि से यह विवाहित स्त्रियों के प्रश्नों में सर्वाधिक अनुकूल है — चाहे प्रश्न दांपत्य सुख का हो या संतान का।
शकुन फल:
यह शकुन स्त्रियों के लिए परम मंगलकारी है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- दांपत्य सुख और सौभाग्य
- संतान प्राप्ति, विशेषकर पुत्र-लाभ
- स्त्री के भाग्य और कल्याण का प्रश्न
- पति की आयु, स्वास्थ्य और उन्नति
- व्रत, पूजा या मन्नत का फल
इस दोहे के आने पर स्त्रियों के लिए परम मंगल है। सौभाग्य, बड़ा भाग्य, पुत्र-प्राप्ति और कल्याण — चारों का संकेत मिलता है।
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