रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 2 — शत्रुघ्नजी के चरण-कमलों का स्मरण; कुशल-क्षेम और कल्याण का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ तुलसीदास जी की उन रचनाओं में गिना जाता है जो भक्ति के साथ-साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देती हैं। यह दोहा पंचम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से दूसरा है — यहाँ भक्ति, बल और बुद्धि तीनों का संयोग है।
शत्रुघ्नजी का स्मरण — कुशल-क्षेम और कल्याण होगा।
मूल दोहा: सत्रुसमन पदपंकरुह सुमिरि करहु सब काज। कुसल खेम कल्यान सुभ सगुन सुमंगल साज॥२॥
शब्दार्थ:
- सत्रुसमन = शत्रुओं का शमन करने वाले
- पदपंकरुह = चरण-कमल
- सुमिरि = स्मरण करके
- करहु सब काज = सब कार्य करो
- कुसल खेम = कुशल-क्षेम
- कल्यान = कल्याण
- सुमंगल साज = सुंदर मंगल की सृष्टि
सत्रुसमन पदपंकरुह सुमिरि करहु सब काज = शत्रुघ्नजी के चरण-कमलों का स्मरण करके सब कार्य करो। कुसल खेम कल्यान सुभ = कुशल-क्षेम रहेगा और कल्याण होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
शत्रुघ्नजी के चरण-कमलों का स्मरण करके सब कार्य करो। कुशल-क्षेम रहेगा और कल्याण होगा। यह शुभ शकुन सुंदर मंगल की सृष्टि करने वाला है।
‘कुसल खेम’ का अर्थ है सुरक्षा और स्वस्थता — अर्थात् कार्य भी सफल होगा और आप सुरक्षित भी रहेंगे।
यह भेद महत्वपूर्ण है। कई बार सफलता मिलती है पर उसकी कीमत स्वास्थ्य या सुरक्षा से चुकानी पड़ती है। यह दोहा दोनों का आश्वासन देता है। शकुन की दृष्टि से यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ जोखिम भरे कार्य में सुरक्षा की चिंता हो।
शकुन फल:
यह शुभ शकुन कुशल-क्षेम और कल्याण का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- जोखिम भरे कार्य में सुरक्षा की चिंता
- कार्य की सफलता के साथ स्वास्थ्य
- शत्रु या विरोधी से मुक्ति
- कोई भी कार्य आरंभ करने का निर्णय
- परिवार की सुरक्षा और कुशलता
इस दोहे के आने पर कुशल-क्षेम और कल्याण दोनों का संकेत है। कार्य भी सफल होगा और आप सुरक्षित भी रहेंगे।
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