रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 1 — शूरशिरोमणि, साहसी और बुद्धिमान हनुमानजी का स्मरण; सुख-संपत्ति और मंगल का श्रेष्ठ प्रश्न-फल।
इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। यह दोहा पंचम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पहला है — यहाँ भक्ति, बल और बुद्धि तीनों का संयोग है।
यह सप्तक नाम-स्मरण का है — आरंभ हनुमानजी से, प्रश्न-फल श्रेष्ठ।
मूल दोहा: सुर सिरोमनि साहसी सुमति समीर कुमार। सुमिरत सब सुख संपदा मुद मंगल दातार॥१॥
शब्दार्थ:
- सुर सिरोमनि = शूरों में शिरोमणि
- साहसी = साहसी
- सुमति = बुद्धिमान
- समीर कुमार = पवनपुत्र (हनुमानजी)
- सुमिरत = स्मरण करने पर
- सुख संपदा = सुख और संपत्ति
- मुद मंगल = आनंद-मंगल
- दातार = देने वाले
सुर सिरोमनि साहसी सुमति समीर कुमार = शूरशिरोमणि, साहसी और बुद्धिमान पवनकुमार। मुद मंगल दातार = आनंद-मंगल के देने वाले हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
शूरशिरोमणि, साहसी और बुद्धिमान श्रीपवनकुमार स्मरण किए जाने पर सब प्रकार के सुख, संपत्ति और आनंद-मंगल देने वाले हैं।
इस दोहे में हनुमानजी के तीन गुण एक साथ गिनाए गए हैं — शूरता, साहस और बुद्धि। सामान्यतः ये तीनों एक व्यक्ति में एक साथ नहीं मिलते।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘श्रेष्ठ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा सभी प्रकार के प्रश्नों में अत्यंत अनुकूल है और विशेषकर उन कार्यों में जहाँ शक्ति और बुद्धि दोनों की आवश्यकता हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- सुख, संपत्ति और आनंद की प्राप्ति
- ऐसा कार्य जिसमें शक्ति और बुद्धि दोनों चाहिए
- साहस की आवश्यकता वाला निर्णय
- मंगलवार या शनिवार से जुड़ा कार्य
- कोई भी कार्य — सभी प्रकार के प्रश्न
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। हनुमानजी का स्मरण करें — सुख, संपत्ति और आनंद तीनों मिलेंगे।
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