रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 7 — आज्ञा लेकर हनुमानजी का रावण के बगीचे में छाँट-छाँटकर फल-भक्षण; उत्तम प्रश्न-फल।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। पंचम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह सातवाँ दोहा है; इस सर्ग में कठिनाई को पार करने का बल बार-बार दिखाई देता है।
आज्ञा लेकर अशोक वाटिका में फल-भक्षण — प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: आसिष आयसु पाय कपि सीय चरनु सिर नाइ। तुलसी रावन बाग फल खात बराइ बराइ॥७॥
शब्दार्थ:
- आसिष = आशीर्वाद
- आयसु = आज्ञा
- पाय = पाकर
- सीय चरनु = सीताजी के चरणों में
- सिर नाइ = मस्तक झुकाकर
- रावन बाग = रावण का बगीचा
- खात = खा रहे हैं
- बराइ बराइ = छाँट-छाँटकर
आसिष आयसु पाय कपि सीय चरनु सिर नाइ = आशीर्वाद और आज्ञा पाकर, सीताजी के चरणों में मस्तक झुकाकर। रावन बाग फल खात बराइ बराइ = रावण के बगीचे में छाँट-छाँटकर फल खा रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं — आशीर्वाद और आज्ञा पाकर, श्रीजानकीजी के चरणों में मस्तक झुकाकर हनुमानजी रावण के बगीचे में छाँट-छाँटकर फल खा रहे हैं।
यहाँ दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, उन्होंने बिना आज्ञा कुछ नहीं किया — पहले अनुमति ली। दूसरी, ‘बराइ बराइ’ अर्थात् छाँट-छाँटकर — उन्होंने जल्दबाज़ी नहीं की, इत्मीनान से सबसे अच्छे फल चुने।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ शत्रु के क्षेत्र में निर्भय होकर कार्य करना, या अनेक विकल्पों में से सबसे अच्छा चुनना विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- अनेक विकल्पों में से सर्वोत्तम का चयन
- विरोधी के क्षेत्र में निर्भय होकर कार्य
- किसी बड़े से अनुमति या स्वीकृति लेना
- इत्मीनान से किया जाने वाला निर्णय
- अप्रत्याशित स्थान से मिलने वाला लाभ
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। जल्दबाज़ी न करें — छाँटकर सबसे अच्छा विकल्प चुनें। पहले उचित अनुमति अवश्य लें।
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