रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 6 — बीस नेत्र होकर भी अपना काल न देख पाने वाला रावण; यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। पंचम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह छठा दोहा है; इस सर्ग में कठिनाई को पार करने का बल बार-बार दिखाई देता है।
रावण का अपना काल न देख पाना — यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
मूल दोहा: सकुल सदन जमराजपुर चलन चहत दसकंधु। काल न देखत काल बस बीस बिलोचन अंधु॥६॥
शब्दार्थ:
- सकुल = पूरे कुल सहित
- सदन = सेना सहित
- जमराजपुर = यमलोक
- चलन चहत = जाना चाहता है
- दसकंधु = दशानन रावण
- काल न देखत = अपना काल नहीं देखता
- बीस बिलोचन = बीस नेत्र
- अंधु = अंधा
सकुल सदन जमराजपुर चलन चहत दसकंधु = रावण पूरे कुल और सेना सहित यमलोक जाना चाहता है। बीस बिलोचन अंधु = बीस नेत्र होने पर भी अंधा है।
भावार्थ / व्याख्या:
रावण अपने पूरे कुल और सारी सेना के साथ यमलोक जाना चाहता है। बीस नेत्र होने पर भी वह ऐसा अंधा हो गया है कि अपना काल देख नहीं पाता।
‘बीस बिलोचन अंधु’ अत्यंत तीखा व्यंग्य है। बीस आँखें होते हुए भी अंधापन — यह शारीरिक नहीं, विवेक का अंधापन है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘निकृष्ट’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में गंभीर चेतावनी देता है जहाँ प्रश्नकर्ता या कोई निकट व्यक्ति स्पष्ट खतरे को अनदेखा कर रहा हो। ऐसा अंधापन पूरे परिवार या संस्था को ले डूबता है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल निकृष्ट है। निम्नलिखित प्रश्नों में गंभीर चेतावनी:
- स्पष्ट खतरे को अनदेखा किया जाना
- अहंकार या ज़िद में लिया जा रहा निर्णय
- ऐसा कदम जो पूरे परिवार या संस्था को प्रभावित करे
- सलाह को बार-बार ठुकराना
- विवेक पर भावना या लोभ का हावी होना
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल निकृष्ट है। जो खतरा स्पष्ट दिख रहा है उसे अनदेखा न करें। अहंकार छोड़ें और तुरंत मार्ग बदलें — देर हुई तो हानि बड़ी होगी।
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