रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 5 श्लोक 2 — सीता-स्वयंवर का समाचार सुनकर सजे-धजे राजाओं का जनकपुर आगमन; शुभ प्रश्न-फल।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। चतुर्थ सर्ग के पाँचवें सप्तक का दूसरा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें उत्सव, विवाह और मंगल-कार्य के शकुन देखे जाते हैं।
स्वयंवर का समाचार सुनकर राजाओं का आगमन — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: सीय स्वयंबर जनकपुर सुनि सुनि सकल नरेस। आए साज समाज सजि भूषन बसन सुदेस॥२॥
शब्दार्थ:
- सीय स्वयंबर = सीताजी का स्वयंवर
- सुनि सुनि = सुन-सुनकर
- सकल नरेस = सभी राजा
- आए = आए
- साज समाज सजि = अपना समाज सजाकर
- भूषन बसन = आभूषण और वस्त्र
- सुदेस = भली प्रकार
सीय स्वयंबर जनकपुर सुनि सुनि सकल नरेस = सीताजी के स्वयंवर का समाचार सुनकर सभी राजा। आए साज समाज सजि = अपना समाज सजाकर आए।
भावार्थ / व्याख्या:
सीताजी के स्वयंवर का समाचार सुनकर सभी राजा आभूषण और वस्त्रों से भली प्रकार सजकर, अपना समाज सजाकर जनकपुर आए।
यह दोहा किसी अवसर पर लोगों के एकत्र होने का चित्र है। जब कोई बड़ा अवसर आता है, तो दूर-दूर से लोग जुटते हैं।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ किसी अवसर, प्रतियोगिता या आयोजन में भाग लेना विषय हो। यह बताता है कि अवसर बड़ा है और उसमें भाग लेना उचित होगा — यद्यपि प्रतिस्पर्धा भी अधिक होगी।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- किसी बड़े अवसर या प्रतियोगिता में भाग लेना
- विवाह संबंधी बातचीत या रिश्ते की तलाश
- किसी बड़े आयोजन या समारोह में सम्मिलित होना
- अनेक विकल्पों में से चयन की स्थिति
- अपनी योग्यता प्रस्तुत करने का अवसर
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। अवसर बड़ा है, प्रतिस्पर्धा भी होगी — पूरी तैयारी के साथ भाग लें।
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