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रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 4

रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 2 श्लोक 4 — अयोध्या में प्रतिदिन बधाई और श्रीराम की बाल-लीला का आनंद; उत्तम प्रश्न-फल।

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सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। प्रस्तुत दोहा चतुर्थ सर्ग के दूसरे सप्तक में चौथा स्थान पर है, जहाँ संतान, यज्ञ और शुभ मुहूर्त के संकेत मिलते हैं।

प्रतिदिन नया मंगल और बाल-लीला — प्रश्न-फल उत्तम है।

मूल दोहा: अनुदिन अवध बधावने, नित नव मंगल मोद। मुदित मातु पितु लोग लखि रघुबर बाल बिनोद॥४॥

शब्दार्थ:

  • अनुदिन = प्रतिदिन
  • बधावने = बधाई के बाजे
  • नित नव = नित्य नवीन
  • मंगल मोद = मंगल और आनंद
  • मुदित = प्रसन्न
  • मातु पितु = माता-पिता
  • लखि = देखकर
  • बाल बिनोद = बालक्रीड़ा

अनुदिन अवध बधावने = अयोध्या में प्रतिदिन बधाई के बाजे बजते हैं। नित नव मंगल मोद = नित्य नवीन आनंद-मंगल होता है।

भावार्थ / व्याख्या:

अयोध्या में प्रतिदिन बधाई के बाजे बज रहे हैं और नित्य नवीन आनंद-मंगल हो रहा है। श्रीरघुनाथजी की बालक्रीड़ा देखकर माताएँ, पिता तथा सब लोग प्रसन्न होते हैं।

‘नित नव’ शब्द इस दोहे की विशेषता है। सामान्यतः उत्सव एक-दो दिन का होता है और फिर सामान्य जीवन लौट आता है। परंतु यहाँ हर दिन नया आनंद है।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा निरंतर सुख का सूचक है — यह बताता है कि जो प्रसन्नता मिलेगी वह क्षणिक नहीं, प्रतिदिन बनी रहेगी।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल उत्तम है और निरंतर सुख का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • घर में निरंतर सुख-शांति और प्रसन्नता
  • बच्चों की परवरिश और उनकी प्रगति
  • दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार
  • माता-पिता और संतान का संबंध
  • लंबे समय तक चलने वाली खुशहाली

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। जो सुख मिलेगा वह क्षणिक नहीं, नित्य नवीन रहेगा। घर में प्रसन्नता का वातावरण बना रहेगा।

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