रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 2 श्लोक 5 — गुरु की आज्ञा से कर्णवेध, चूड़ाकरण आदि संस्कार; संस्कार-कार्यों का शुभ शकुन।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। प्रस्तुत दोहा चतुर्थ सर्ग के दूसरे सप्तक में पाँचवाँ स्थान पर है, जहाँ संतान, यज्ञ और शुभ मुहूर्त के संकेत मिलते हैं।
गुरु की आज्ञा से संस्कार — संस्कार संबंधी प्रश्नों में शुभ फल।
मूल दोहा: करनबेध चूड़ाकरन लौकिक बैदिक काज। गुरु आयसु भूपति करत मंगल साज समाज॥५॥
शब्दार्थ:
- करनबेध = कर्णवेध संस्कार
- चूड़ाकरन = मुंडन संस्कार
- लौकिक = लोक-व्यवहार संबंधी
- बैदिक = वैदिक विधि
- गुरु आयसु = गुरु की आज्ञा से
- भूपति = महाराज
- करत = करते हैं
- मंगल साज समाज = मंगल-साज और समाज के साथ
गुरु आयसु भूपति करत = गुरु की आज्ञा से महाराज करते हैं। मंगल साज समाज = मंगल-साज सजाकर समाज के साथ।
भावार्थ / व्याख्या:
गुरुदेव की आज्ञा से महाराज दशरथ मंगल-साज सजाकर कर्णवेध, चूड़ाकरण आदि लौकिक-वैदिक विधियों सहित सब संस्कार समाज के साथ करते हैं।
इस दोहे में तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं — गुरु की आज्ञा, विधि का पालन, और समाज की उपस्थिति। संस्कार अकेले में नहीं, समाज के साक्ष्य में किए जाते हैं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा संस्कार और मांगलिक कार्यों के प्रश्नों में शुभ है। यह मार्गदर्शन भी देता है — किसी योग्य व्यक्ति की सलाह लें, विधि का पालन करें और परिवार-समाज को साथ रखें।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है और संस्कार-कार्यों के लिए अनुकूल है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कर्णवेध, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि संस्कार
- विवाह, गृह प्रवेश या नामकरण
- किसी विधि-विधान से किया जाने वाला कार्य
- गुरु या पुरोहित की सलाह से लिया गया निर्णय
- सामाजिक आयोजन और समारोह
इस दोहे के आने पर संस्कार और मांगलिक कार्यों में शुभ फल है। किसी योग्य व्यक्ति की सलाह लें और परिवार-समाज को साथ रखें — कार्य निर्विघ्न पूरा होगा।
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