रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 2 श्लोक 3 — पुत्रों के कल्याण हेतु दशरथजी का दान और रनिवास का दिन-रात आनंद; श्रेष्ठ प्रश्न-फल।
शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। प्रस्तुत दोहा चतुर्थ सर्ग के दूसरे सप्तक में तीसरा स्थान पर है, जहाँ संतान, यज्ञ और शुभ मुहूर्त के संकेत मिलते हैं।
पुत्रों के कल्याण हेतु दान — यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
मूल दोहा: पुत्र काज कल्यान नृप दिए बहु भाँति। रहस बिबस रनिवास सब मुद मंगल दिन राति॥३॥
शब्दार्थ:
- पुत्र काज = पुत्रों के लिए
- कल्यान = कल्याण
- नृप = राजा
- दिए बहु भाँति = अनेक प्रकार से दिया
- रहस बिबस = आनंद में मग्न
- रनिवास = अंतःपुर
- मुद मंगल = आनंद-मंगल
- दिन राति = दिन-रात
पुत्र काज कल्यान नृप दिए बहु भाँति = पुत्रों के कल्याण के लिए महाराज ने बहुत प्रकार से दान दिए। मुद मंगल दिन राति = दिन-रात आनंद-मंगल हो रहा है।
भावार्थ / व्याख्या:
पुत्रों के कल्याण के लिए महाराज दशरथ ने बहुत प्रकार से दान दिए। पूरा रनिवास आनंद में मग्न है और दिन-रात आनंद-मंगल हो रहा है।
इस दोहे में एक सुंदर परंपरा दिखाई देती है — प्रसन्नता के अवसर पर दान। दशरथजी ने केवल उत्सव नहीं मनाया, दान भी दिया, क्योंकि जो मिला है उसे बाँटने से वह स्थायी होता है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘श्रेष्ठ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ दान, सेवा या किसी की भलाई का कार्य विषय हो। संदेश यह है कि दान से आपका सुख घटेगा नहीं, बढ़ेगा।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- दान, सेवा या परोपकार का कार्य
- संतान के कल्याण हेतु किया जा रहा उपाय
- घर में निरंतर सुख-शांति का वातावरण
- किसी शुभ अवसर पर आयोजन या भंडारा
- पुण्य कर्म से भाग्य सुधारने का प्रयत्न
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। दिन-रात मंगल का संकेत है। दान और सेवा का कोई कार्य करें — इससे फल और शीघ्र तथा स्थायी होगा।
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