रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 4 श्लोक 4 — राम-नाम कलियुग का कल्पवृक्ष और समस्त मंगलों का मूल; करतल-सिद्धि और परमानंद का शुभ शकुन।
सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। यह दोहा तृतीय सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से चौथा है — यहाँ विरह, खोज और कठिनाई से पार पाने के संकेत मिलते हैं।
राम-नाम कलियुग का कल्पवृक्ष — यह प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: राम नाम कलि कामतरु, सकल सुमंगल कंद। सुमिरत करतल सिद्धि जग, पग पग परमानंद॥४॥
शब्दार्थ:
- राम नाम = श्रीराम का नाम
- कलि = कलियुग
- कामतरु = कल्पवृक्ष
- सकल सुमंगल कंद = समस्त मंगलों का मूल
- करतल सिद्धि = हथेली में सिद्धि
- जग = संसार में
- पग पग = पद-पद पर
- परमानंद = परम सुख
राम नाम कलि कामतरु = राम-नाम कलियुग में कल्पवृक्ष के समान है। पग पग परमानंद = पद-पद पर परम सुख प्राप्त होता है।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम-नाम कलियुग में कल्पवृक्ष के समान अभीष्टदाता है और समस्त श्रेष्ठ मंगलों का मूल है। उसका स्मरण करने से संसार में सब सिद्धियाँ हाथ में आ जाती हैं और पद-पद पर परम सुख प्राप्त होता है।
कल्पवृक्ष की विशेषता यह है कि वह जो माँगा जाए वही देता है — उसका फल पूर्वनिर्धारित नहीं होता। तुलसीदास जी कहते हैं कि कलियुग में राम-नाम की वही सामर्थ्य है।
‘कंद’ शब्द भी महत्वपूर्ण है — इसका अर्थ है जड़ या मूल। अर्थात् राम-नाम केवल एक मंगल नहीं देता, बल्कि वह जड़ है जिससे सारे मंगल फूटते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है और सभी प्रकार के प्रश्नों में अनुकूल उत्तर देता है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित सभी प्रश्नों में अनुकूल:
- कोई भी मनोकामना या इच्छा की पूर्ति
- सभी प्रकार के कार्य और निर्णय
- नाम-जप, साधना या भक्ति मार्ग
- सिद्धि, सफलता और आंतरिक संतोष
- दैनिक जीवन में निरंतर सुख-शांति
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। राम-नाम कलियुग का कल्पवृक्ष है — जो माँगेंगे वही मिलेगा। पद-पद पर सुख और सिद्धि का संकेत है।
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