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रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 5 — जटायु का सीता का समाचार देकर ‘सीता-राम’ कहते हुए देह-त्याग; यह प्रश्न-फल अशुभ है।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। तृतीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पाँचवाँ दोहा है; इस सर्ग में वन-प्रवास और राक्षसों से संघर्ष के प्रसंग प्रमुख हैं।

जटायु का देह-त्याग — यह प्रश्न-फल अशुभ है।

मूल दोहा: रघुबर बिकल बिहंग लखि सो बिलोकि दोउ बीर। सिय सुधि कहि सिय राम कहि तजी देह मतिधीर॥५॥

शब्दार्थ:

  • रघुबर = श्रीरघुनाथजी
  • बिकल = व्याकुल
  • बिहंग = पक्षी (जटायु)
  • लखि = देखकर
  • बिलोकि = देखकर
  • सिय सुधि = सीताजी का समाचार
  • तजी देह = शरीर त्याग दिया
  • मतिधीर = धीरबुद्धि वाले

रघुबर बिकल बिहंग लखि = पक्षी जटायु को देखकर श्रीराम व्याकुल हो गए। सिय राम कहि तजी देह = ‘सीता-राम’ कहकर शरीर छोड़ दिया।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीरघुनाथजी पक्षी जटायु को घायल देखकर व्याकुल हो गए। जटायु ने दोनों भाइयों को देखा, उनसे श्रीजानकीजी का समाचार कहा, और उस धीरबुद्धि ने ‘श्रीसीता-राम’ कहकर शरीर छोड़ दिया।

जटायु ने मरते समय भी पहले अपना कर्तव्य पूरा किया — समाचार दिया — और तभी प्राण छोड़े। यही कारण है कि तुलसीदास जी उन्हें ‘मतिधीर’ कहते हैं।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा अशुभ है, क्योंकि यह किसी के अंत, वियोग या समापन का संकेत देता है। परंतु इसमें एक गरिमा भी है — जो जा रहा है, वह अपना कर्तव्य पूरा करके और सद्गति पाकर जा रहा है।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में सावधानी आवश्यक:

  • किसी गंभीर रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की स्थिति
  • किसी संबंध या अध्याय का समापन
  • अंतिम समय में मिलने वाली महत्वपूर्ण सूचना
  • वृद्धजन या बुज़ुर्ग सेवक से जुड़ा प्रश्न
  • किसी की सेवा या अंतिम सहायता का कार्य

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। जो समाप्त हो रहा है उसे सम्मान के साथ विदा करें। शोक स्वाभाविक है, पर जो सूचना या सीख मिल रही है उसे संभालकर रखें — वही आगे का मार्ग खोलेगी।

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