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रामाज्ञा प्रश्न / तृतीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न तृतीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 6 — श्रीराम द्वारा जटायु का पिता से भी दसगुनी श्रद्धा से अंत्येष्टि कर्म; यह प्रश्न-फल शोक सूचक है।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। तृतीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह छठा दोहा है; इस सर्ग में वन-प्रवास और राक्षसों से संघर्ष के प्रसंग प्रमुख हैं।

जटायु का अंत्येष्टि-कर्म — यह प्रश्न-फल शोक सूचक है।

मूल दोहा: दसरथ ते दसगुन भगति सहित तासु करि काज। सोचत बंधु समेत प्रभु कृपासिंधु रघुराज॥६॥

शब्दार्थ:

  • दसरथ ते = दशरथजी से भी
  • दसगुन = दसगुनी
  • भगति सहित = भक्तिपूर्वक
  • तासु = उसका
  • करि काज = अंत्येष्टि कर्म करके
  • सोचत = शोक करते हैं
  • बंधु समेत = भाई के साथ
  • कृपासिंधु = कृपा के सागर

दसरथ ते दसगुन भगति सहित = दशरथजी से भी दसगुनी भक्ति के साथ। सोचत बंधु समेत प्रभु = भाई के साथ प्रभु शोक कर रहे हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

महाराज दशरथजी से भी दसगुनी भक्तिपूर्वक उस गृध्रराज जटायु का अंत्येष्टि कर्म करके कृपासागर प्रभु श्रीरघुनाथजी भाई लक्ष्मण के साथ शोक कर रहे हैं।

यह प्रसंग श्रीराम के चरित्र का सबसे उज्ज्वल पक्ष दिखाता है। जटायु उनके पिता नहीं थे, न कोई संबंधी — एक पक्षी थे। फिर भी श्रीराम ने उनका अंतिम संस्कार पिता से भी अधिक श्रद्धा से किया, क्योंकि जटायु ने कर्तव्य निभाया था।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा शोक सूचक है। यह बताता है कि प्रश्नकर्ता को किसी के जाने का दुःख सहना पड़ सकता है। साथ ही यह मार्गदर्शन भी देता है — जो सेवा करके गया है, उसका सम्मान पूरी श्रद्धा से करें।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल शोक सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • किसी के निधन या वियोग से जुड़ा प्रश्न
  • अंतिम संस्कार, श्राद्ध या पितृकार्य
  • किसी सेवक, मित्र या सहयोगी की विदाई
  • शोक की स्थिति में निभाए जाने वाले कर्तव्य
  • कृतज्ञता या सम्मान प्रकट करने का अवसर

इस दोहे के आने पर शोक की सूचना मिलती है। जो चला गया है उसका सम्मान पूरी श्रद्धा से करें — श्रीराम ने भी यही किया। कर्तव्य निभाने वाले को कभी न भूलें।

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