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रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 2

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 2 — नदियों-सरोवरों का जल से भरना और कमलों का खिलना; राजा-प्रजा संबंध के लिए शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। द्वितीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें दूसरा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः धैर्य रखने का संकेत देते हैं।

नदियाँ-सरोवर जल से भरे — राजा-प्रजा संबंध के लिए शुभ शकुन।

मूल दोहा: सरित सरोबर सजल सब जलज बिपुल बहु रंग। समउ सुहावन सगुन सुभ राजा प्रजा प्रसंग॥२॥

शब्दार्थ:

  • सरित = नदियाँ
  • सरोबर = सरोवर, तालाब
  • सजल = जल से भरे
  • जलज = कमल
  • बिपुल = बहुत अधिक
  • बहु रंग = अनेक रंगों के
  • समउ = समय
  • राजा प्रजा प्रसंग = राजा-प्रजा के संबंध में

सरित सरोबर सजल सब = सब नदियाँ और सरोवर जल से भरे हैं। राजा प्रजा प्रसंग = राजा-प्रजा के संबंध में यह शकुन शुभ है।

भावार्थ / व्याख्या:

सब नदियाँ और सरोवर जल से भरे रहने लगे और उनमें अनेक रंगों के कमल खिल गए। बड़ा सुहावना समय हो गया।

तुलसीदास जी कहते हैं कि राजा-प्रजा के संबंध में यह शकुन शुभ है।

जल से भरे सरोवर समृद्धि और स्थिरता के प्रतीक हैं। जहाँ जल है, वहाँ जीवन है, कृषि है, व्यापार है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा शासक और शासित, स्वामी और सेवक, संस्था और कर्मचारी — इन सभी संबंधों में सामंजस्य का संकेत देता है। यह उन प्रश्नों में विशेष शुभ है जो सरकारी कार्य, प्रशासन या नेतृत्व से जुड़े हों।

शकुन फल:

यह शकुन राजा-प्रजा संबंध और समृद्धि के लिए शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • सरकारी कार्य, आवेदन या प्रशासनिक मामला
  • नेतृत्व, प्रबंधन या अधिकार से जुड़ा प्रश्न
  • मालिक-कर्मचारी या स्वामी-सेवक संबंध
  • जल, सिंचाई या कृषि संबंधी विषय
  • समृद्धि और आर्थिक स्थिरता

इस दोहे के आने पर समय सुहावना और शकुन शुभ है। सरकारी या प्रशासनिक कार्य में सफलता मिलेगी और संबंधों में सामंजस्य रहेगा।

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