रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — अगस्त्य आज्ञा से पंचवटी में निवास और शापग्रस्त भूमि का पवित्र होना; विपत्ति दूर होने का शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। द्वितीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः धैर्य रखने का संकेत देते हैं।
पंचवटी में निवास — विपत्ति दूर होकर सुख मिलने का शकुन।
मूल दोहा: सुनि मुनि आयसु प्रभु कियो पंचबटी बर बास। भइ महि पावनि परसि पद, भा सब भाँति सुपास॥१॥
शब्दार्थ:
- मुनि आयसु = मुनि (अगस्त्यजी) की आज्ञा
- कियो = किया
- पंचबटी = पंचवटी
- बर बास = सुंदर निवास
- भइ महि पावनि = भूमि पवित्र हो गई
- परसि पद = चरण-स्पर्श से
- सुपास = सुख-सुविधा
प्रभु कियो पंचबटी बर बास = प्रभु ने पंचवटी में सुंदर निवास किया। भा सब भाँति सुपास = सब प्रकार से सुख-सुविधा हो गई।
भावार्थ / व्याख्या:
मुनि अगस्त्यजी की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम ने सुंदर पंचवटी में निवास किया। उनके श्रीचरणों का स्पर्श करके दंडकवन की शापग्रस्त भूमि पवित्र हो गई और वहाँ सब प्रकार से सुख-सुविधा हो गई।
यह दोहा एक सुंदर परिवर्तन का वर्णन है। जो भूमि शापग्रस्त थी, वह चरण-स्पर्श मात्र से पवित्र हो गई।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा विपत्ति दूर होकर सुख मिलने का सूचक है। यह उन प्रश्नों में विशेष शुभ है जहाँ किसी स्थान, संपत्ति या परिस्थिति में लंबे समय से कोई दोष या समस्या बनी हुई हो। संदेश यह है कि वह दोष दूर होगा और स्थिति अनुकूल बनेगी।
शकुन फल:
यह शकुन विपत्ति दूर होकर सुख मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी स्थान या संपत्ति से जुड़ा पुराना दोष
- नए घर, दुकान या स्थान पर बसना
- लंबे समय से चली आ रही विपत्ति का अंत
- किसी बड़े के मार्गदर्शन से लिया गया निर्णय
- परिस्थिति में अनुकूल परिवर्तन
इस दोहे के आने पर विपत्ति दूर होकर सुख मिलने का संकेत है। जो स्थान या स्थिति दोषपूर्ण लग रही थी, वह अनुकूल बनेगी।
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