रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 3 — राम-लक्ष्मण के वन-रक्षक बनने से प्रकृति, पशु-पक्षियों का आनंद; यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। द्वितीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें तीसरा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः धैर्य रखने का संकेत देते हैं।
दोनों भाई वन के रक्षक — यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
मूल दोहा: बिटप बेलि फुलहि फलहिं, सीतल सुखद समीर। मुदित बिहँग मृग मधूप गन बन पालक दोउ बीर॥३॥
शब्दार्थ:
- बिटप = वृक्ष
- बेलि = लता
- सीतल सुखद समीर = शीतल और सुखदायी वायु
- मुदित = आनंदित
- बिहँग = पक्षी
- मृग = पशु
- मधूप गन = भौंरों का समूह
- बन पालक = वन के रक्षक
- दोउ बीर = दोनों वीर भाई
सीतल सुखद समीर = शीतल और सुखदायी वायु चलती है। बन पालक दोउ बीर = दोनों भाई अब वन के रक्षक हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
वृक्ष और लताएँ फूलते-फलते हैं, सुखदायी शीतल वायु चलती है, पक्षी, पशु तथा भौंरे आनंद में हैं — क्योंकि अब दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण वन की रक्षा करने वाले हैं।
इस दोहे में एक स्पष्ट कार्य-कारण संबंध है। प्रकृति की यह प्रसन्नता संयोग नहीं, बल्कि सुरक्षा की भावना का परिणाम है। जब रक्षक विश्वसनीय हो, तो सब निश्चिंत होकर फलते-फूलते हैं।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को श्रेष्ठ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा सुरक्षा, संरक्षण और उसके अंतर्गत होने वाली उन्नति का सूचक है। यह बताता है कि आपको एक सुरक्षित वातावरण मिलेगा जिसमें आपकी वृद्धि होगी।
शकुन फल:
यह शकुन श्रेष्ठ है और सुरक्षा के साथ उन्नति का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- सुरक्षा, संरक्षण या किसी के आश्रय का प्रश्न
- अनुकूल वातावरण में की जाने वाली उन्नति
- खेती, बागवानी या प्राकृतिक संसाधन
- स्वास्थ्य, शांति और सुखद जीवन
- किसी विश्वसनीय व्यक्ति के संरक्षण में कार्य
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उसी में आपकी उन्नति होगी। निश्चिंत होकर आगे बढ़ें।
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