रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 6 श्लोक 3 — समस्त संकटों को दूर करने वाला शकुन; चित्रकूट में सीताराम कृपा से थोड़े साधन में बड़ा लाभ।
शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। इस छठे सप्तक के तीसरा दोहे में द्वितीय सर्ग का वही भाव है जहाँ परिस्थिति बदलती है और शकुन भी उसी के अनुसार फल देता है।
यह शकुन समस्त संकटों को दूर करने वाला है — थोड़े साधन से बड़ा लाभ।
मूल दोहा: सगुन सकल संकट समन चित्रकूट चलि जाहु। सीता राम प्रसाद सुभ लघु साधन बड़ लाहु॥३॥
शब्दार्थ:
- सगुन = शकुन
- सकल संकट समन = समस्त संकटों को दूर करने वाला
- चलि जाहु = चले जाओ
- प्रसाद = कृपा
- लघु साधन = थोड़े साधन, कम संसाधन
- बड़ लाहु = बड़ा लाभ
सगुन सकल संकट समन = यह शकुन समस्त संकटों को दूर करने वाला है। लघु साधन बड़ लाहु = थोड़े साधन से बड़ा लाभ होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन समस्त संकटों को दूर करने वाला है। चित्रकूट चले जाओ — वहाँ श्रीसीताराम की कृपा से भला होगा।
और फिर एक अत्यंत आश्वस्त करने वाली बात जोड़ते हैं — ‘लघु साधन बड़ लाहु’, अर्थात् थोड़े से साधन से भी वहाँ बड़ा लाभ होगा।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन लोगों के लिए विशेष शुभ है जिनके पास संसाधन सीमित हैं परंतु लक्ष्य बड़ा है। यह आश्वासन देता है कि कम पूँजी, कम सहायता या कम अनुभव के बावजूद परिणाम बड़ा मिलेगा।
शकुन फल:
यह शकुन संकट-निवारण और थोड़े साधन में बड़े लाभ का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- सीमित पूँजी या संसाधन में बड़ा कार्य
- किसी संकट या कठिनाई से मुक्ति
- छोटे निवेश से बड़े लाभ की संभावना
- तीर्थयात्रा या धार्मिक प्रवास
- अकेले या कम सहायता से किया जा रहा प्रयत्न
इस दोहे के आने पर सभी संकट दूर होने का संकेत है। साधनों की कमी की चिंता न करें — थोड़े में भी बड़ा लाभ मिलेगा।
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