रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 6 श्लोक 2 — मंदाकिनी तट की स्फटिक शिला सीता-राम की क्रीड़ाभूमि; रामभक्तों को इसी जन्म में भक्ति-भंडार का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ तुलसीदास जी की उन रचनाओं में गिना जाता है जो भक्ति के साथ-साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देती हैं। इस छठे सप्तक के दूसरा दोहे में द्वितीय सर्ग का वही भाव है जहाँ परिस्थिति बदलती है और शकुन भी उसी के अनुसार फल देता है।
स्फटिक शिला और मंदाकिनी — रामभक्तों के लिए भक्ति का भंडार।
मूल दोहा: फटिक सिला मन्दाकिनी सिय रघुबीर बिहारा। राम भक्त हित सगुन सुभ भूतल भगति भँडार॥२॥
शब्दार्थ:
- फटिक सिला = स्फटिक शिला
- मन्दाकिनी = मंदाकिनी नदी
- बिहारा = क्रीड़ाभूमि, विहार-स्थल
- राम भक्त हित = रामभक्तों के लिए
- भूतल = पृथ्वी पर
- भगति भँडार = भक्ति का भंडार
सिय रघुबीर बिहारा = श्रीसीता-रामजी की क्रीड़ाभूमि है। भूतल भगति भँडार = पृथ्वी पर ही भक्ति का भंडार प्राप्त होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
मंदाकिनी के तट पर स्थित स्फटिक शिला श्रीसीता-रामजी की क्रीड़ाभूमि है। तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीराम-भक्तों के लिए यह शकुन शुभ है।
इसका फल भी वे स्पष्ट बताते हैं — पृथ्वी पर, अर्थात् इसी जन्म में, भक्ति का भंडार प्राप्त होगा।
यह आश्वासन विशेष है। सामान्यतः आध्यात्मिक फल के लिए मृत्यु के बाद की बात की जाती है, परंतु यहाँ ‘भूतल’ अर्थात् इसी लोक, इसी जीवन में श्रेष्ठ भक्ति की प्राप्ति का वचन है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा भक्ति और आध्यात्मिक मार्ग के प्रश्नों में सर्वाधिक शुभ है।
शकुन फल:
यह शकुन रामभक्तों के लिए शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उन्नति
- तीर्थयात्रा, विशेषकर चित्रकूट
- पूजा-पाठ, कथा या सत्संग का आयोजन
- मन की शांति और आंतरिक संतोष
- इसी जीवन में सार्थकता की तलाश
इस दोहे के आने पर रामभक्तों के लिए अत्यंत शुभ संकेत है। इसी जीवन में भक्ति का भंडार मिलेगा — श्रद्धा बनाए रखें।
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