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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 7 — अयोध्या में बधाई, मंगलगीत, तोरण और पताकाओं की सजावट; उत्सव और आनंद का शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। इस छठे सप्तक के सातवाँ दोहे में प्रथम सर्ग की वही धारा है जो आश्वस्त करती है कि आरंभ शुभ हो तो अंत भी शुभ होता है।

अयोध्या में उत्सव और सजावट — शुभ प्रश्न-फल।

मूल दोहा: अवध अनंद बधावनो, मंगल गान निसान। तुलसी तोरन कलस पुर चँवर पताका बितान॥७॥

शब्दार्थ:

  • अवध = अयोध्या
  • बधावनो = बधाई, आनंद के बाजे
  • निसान = नगाड़े, डंके
  • तोरन = तोरण, बंदनवार
  • कलस = कलश
  • चँवर = चँवर
  • पताका = ध्वजा
  • बितान = मंडप

अवध अनंद बधावनो = अयोध्या में आनंद की बधाई बज रही है। चँवर पताका बितान = चँवर और पताका सहित मंडप सजाए गए हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी कहते हैं कि अयोध्या में आनंद की बधाई बज रही है, मंगलगीत गाए जा रहे हैं और डंकों पर चोट पड़ रही है। नगर में तोरण बँधे हैं, कलश सजे हैं तथा चँवर और पताका सहित मंडप सजाए गए हैं।

यह दोहा सामूहिक उत्सव का पूर्ण चित्र है। यहाँ केवल परिवार नहीं, पूरा नगर सज-धज कर आनंद मना रहा है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ फल का सूचक है। यह विशेषकर उन प्रश्नों में शुभ है जहाँ आयोजन, सजावट, स्वागत या सार्वजनिक उत्सव विषय हो। यह संकेत देता है कि आने वाला समय आनंद और उत्सव का होगा।

शकुन फल:

यह शकुन शुभ है और उत्सव-आनंद का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • विवाह, समारोह या उत्सव का आयोजन
  • गृह प्रवेश या नए स्थान का शुभारंभ
  • किसी का स्वागत या अभिनंदन
  • सार्वजनिक कार्यक्रम की सफलता
  • परिवार और समाज में प्रसन्नता का अवसर

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। घर और आसपास उत्सव का वातावरण बनेगा। आयोजन सफल होगा और सब प्रसन्न रहेंगे।

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