रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — अयोध्या के रनिवास में माताओं द्वारा परछन और मंगल आरती; स्वागत और आनंद का शुभ शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। प्रथम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — यहाँ वंदना का भाव और शकुन का निर्णय दोनों साथ-साथ चलते हैं।
अयोध्या में परिछन का मंगल प्रसंग — शुभ प्रश्न-फल।
मूल दोहा: साजि सुमंगल आरती, रहस बिबस रनिवासु। मुदित मात परिछन चलीं उमगत हृदयँ हुलासु॥१॥
शब्दार्थ:
- साजि = सजाकर
- सुमंगल आरती = मंगल आरती
- रहस बिबस = आनंद से विह्वल
- रनिवासु = रनिवास, अंतःपुर
- मुदित = प्रसन्न
- मात = माताएँ
- परिछन = परछन (स्वागत की रस्म)
- हुलासु = उल्लास, आनंद
रहस बिबस रनिवासु = रनिवास आनंद से विह्वल हो गया। उमगत हृदयँ हुलासु = हृदय में आनंद की बाढ़ आ रही है।
भावार्थ / व्याख्या:
अयोध्या का रनिवास आनंद में मग्न हो गया। मंगल आरती सजाकर माताएँ वर और वधुओं का परछन करने चलीं। सबके हृदय में आनंद की बाढ़ आ रही है।
परछन भारतीय परंपरा की वह सुंदर रस्म है जिसमें घर की स्त्रियाँ नववधू और वर का स्वागत करती हैं। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नए सदस्य को परिवार में हृदय से स्वीकार करने का प्रतीक है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ फल का सूचक है। यह विशेषकर स्वागत, गृह प्रवेश और नए संबंध के आरंभ से जुड़े प्रश्नों में अनुकूल संकेत देता है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- नववधू का गृह प्रवेश या स्वागत
- नए सदस्य का परिवार या संस्था में आना
- गृह प्रवेश और घर से जुड़े मांगलिक कार्य
- घर की स्त्रियों या माताओं से जुड़े प्रश्न
- किसी शुभ अवसर पर स्वागत-सत्कार
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। घर में आनंद और उल्लास का वातावरण रहेगा तथा नए संबंध सहर्ष स्वीकार किए जाएँगे।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।