रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 6 — परशुरामजी द्वारा श्रीराम को धनुष सौंपकर आशीर्वाद; विजय और मंगल का शुभ शकुन।
तुलसीदास जी की यह कृति प्रश्न और उत्तर की उस प्राचीन पद्धति को जीवित रखती है जिसमें रामकथा ही प्रमाण है। इस छठे सप्तक के छठा दोहे में प्रथम सर्ग की वही धारा है जो आश्वस्त करती है कि आरंभ शुभ हो तो अंत भी शुभ होता है।
परशुरामजी का आशीर्वाद — विजय और मंगल का शकुन।
मूल दोहा: प्रभुहि सौपि सारंग मुनि दीन्ह सुआसिरबाद। जय मंगल सूचक सगुन राम राम संबाद॥६॥
शब्दार्थ:
- प्रभुहि = प्रभु श्रीराम को
- सौपि = सौंपकर
- सारंग = शार्ङ्ग धनुष
- मुनि = मुनि परशुरामजी
- सुआसिरबाद = उत्तम आशीर्वाद
- जय मंगल सूचक = विजय और मंगल का सूचक
- संबाद = वार्ता, संवाद
प्रभुहि सौपि सारंग मुनि = मुनि ने प्रभु को शार्ङ्ग धनुष सौंपा। राम राम संबाद = श्रीराम और परशुरामजी की वार्ता।
भावार्थ / व्याख्या:
प्रभु श्रीराम को अपना शार्ङ्ग धनुष सौंपकर मुनि परशुरामजी ने उन्हें आशीर्वाद दिया। तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीराम और परशुरामजी की इस वार्ता का शकुन विजय और मंगल सूचित करने वाला है।
यह प्रसंग शिक्षाप्रद है। कुछ क्षण पहले जो व्यक्ति काल के समान क्रोधित था, वही अब आशीर्वाद दे रहा है। यह परिवर्तन किसी बल या तर्क से नहीं, बल्कि श्रीराम की विनम्रता और सहजता से हुआ।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अत्यंत शुभ है। यह बताता है कि जो विरोध या शत्रुता सामने खड़ी है, वह मित्रता में बदल सकती है। कठोर व्यक्ति भी अनुकूल होगा और विजय के साथ-साथ आशीर्वाद भी मिलेगा।
शकुन फल:
यह शकुन विजय और मंगल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- किसी विरोधी या नाराज़ व्यक्ति से मेल-मिलाप
- विवाद का सम्मानजनक समाधान
- किसी वरिष्ठ या प्रभावशाली व्यक्ति से समर्थन
- अधिकार, पद या उत्तरदायित्व का हस्तांतरण
- कठिन परिस्थिति का अनुकूल मोड़ लेना
इस दोहे के आने पर विजय और मंगल का संकेत मिलता है। जो विरोध दिख रहा है, वह समर्थन में बदलेगा। विनम्रता बनाए रखें — यही आपकी सबसे बड़ी शक्ति है।
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