रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 6 श्लोक 5 — परशुरामजी का काल समान रौद्र रूप देखकर समाज का विलाप; यह शकुन निकृष्ट फल का सूचक है।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। इस छठे सप्तक के पाँचवाँ दोहे में प्रथम सर्ग की वही धारा है जो आश्वस्त करती है कि आरंभ शुभ हो तो अंत भी शुभ होता है।
परशुरामजी का रौद्र रूप — यह दोहा निकृष्ट फल का सूचक है।
मूल दोहा: रोष कलुष लोचन भ्रुकुटि, पानि परसु धनु बान। काल कराल बिलोकि मुनि सब समाज बिलखान॥५॥
शब्दार्थ:
- रोष = क्रोध
- कलुष लोचन = लाल नेत्र
- भ्रुकुटि = टेढ़ी भौंहें
- पानि = हाथ
- परसु = फरसा
- काल कराल = भयंकर काल
- बिलोकि = देखकर
- बिलखान = दुःखी हो गया
रोष कलुष लोचन भ्रुकुटि = क्रोध से लाल नेत्र और टेढ़ी भौंहें। सब समाज बिलखान = पूरा समाज दुःखी हो गया।
भावार्थ / व्याख्या:
क्रोध से लाल नेत्र और टेढ़ी भौंहें किए, हाथ में फरसा तथा धनुष-बाण लिए मुनि परशुरामजी को साक्षात भयंकर काल के समान देखकर पूरा समाज दुःखी हो गया।
यह दोहा भय और आतंक के चरम क्षण का वर्णन है। जिस समाज में कुछ क्षण पहले उत्सव था, वहाँ अब सन्नाटा और शोक छा गया।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा निकृष्ट फल का सूचक है। यह उन प्रश्नों में विशेष चेतावनी देता है जहाँ किसी क्रोधी, शक्तिशाली या आक्रामक व्यक्ति से सामना होने की संभावना हो। ऐसे समय में सीधा टकराव आत्मघाती होता है — विनम्रता और धैर्य ही मार्ग है।
शकुन फल:
यह शकुन निकृष्ट फल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी रखें:
- किसी क्रोधी या शक्तिशाली व्यक्ति से सामना
- विवाद, झगड़ा या कानूनी टकराव
- ऐसा कार्य जिसमें विरोध या शत्रुता बढ़े
- भय, आतंक या असुरक्षा की स्थिति
- जल्दबाज़ी में लिया जा रहा आक्रामक निर्णय
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल निकृष्ट है। इस समय कोई आक्रामक कदम न उठाएँ। मौन, विनम्रता और प्रतीक्षा ही सबसे सुरक्षित मार्ग है। स्थिति स्वयं बदलेगी।
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