रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 4 — सोमवार को रस, गोरस, खेती और ब्राह्मण-कार्य संबंधी प्रश्न; सुशासन और प्रसन्नता का शकुन।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। यह पहले सप्तक का चौथा दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।
सोमवार का वार-विचार — रस, गोरस, खेती और ब्राह्मण-कार्य।
मूल दोहा: रस गोरस खेती सकल बिप्र काज सुभ साज। राम अनुग्रहँ सोम दिन प्रमुदित प्रजा सुराज॥४॥
शब्दार्थ:
- रस = रस, तरल पदार्थ
- गोरस = दूध, दही, घी
- खेती = कृषि
- बिप्र काज = ब्राह्मणों के कार्य
- सुभ साज = शुभ साज-सज्जा
- राम अनुग्रहँ = श्रीराम की कृपा से
- सोम दिन = सोमवार
- सुराज = उत्तम शासन
रस गोरस खेती सकल बिप्र काज सुभ साज = रस, गोरस, खेती और ब्राह्मण-कार्य के प्रश्न। राम अनुग्रहँ सोम दिन प्रमुदित प्रजा सुराज = सोमवार को, श्रीराम की कृपा से प्रजा सुशासन पाकर आनंदित रहेगी।
भावार्थ / व्याख्या:
रस, गोरस अर्थात् दूध-दही-घी, खेती, ब्राह्मणों के कार्य तथा शुभ साज-सज्जा संबंधी प्रश्न सोमवार को करना चाहिए। श्रीराम की कृपा से उत्तम शासन पाकर प्रजा आनंदित रहेगी।
सोमवार चन्द्रमा का दिन है और चन्द्रमा जल, रस, दूध, कृषि तथा मन का कारक ग्रह है। इसीलिए इन विषयों के प्रश्न सोमवार को उपयुक्त बताए गए हैं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा कृषि, दुग्ध-व्यवसाय, तरल पदार्थों के व्यापार और धार्मिक कार्यों से जुड़े प्रश्नों में विशेष अनुकूल है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है, विशेषकर निम्नलिखित प्रश्नों में:
- खेती, फसल और कृषि संबंधी प्रश्न
- दूध, दही, घी या डेयरी व्यवसाय
- रस, पेय या तरल पदार्थ का व्यापार
- ब्राह्मणों, पुरोहितों या धार्मिक कार्य
- सोमवार को आरंभ किया जाने वाला कार्य
इस दोहे के आने पर श्रीराम की कृपा से शुभ फल मिलेगा। कृषि, दुग्ध या धार्मिक कार्य से जुड़े प्रश्न सोमवार को करें — परिणाम अनुकूल रहेगा।
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