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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 3

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 3 — रविवार को राजकार्य, मणि, स्वर्ण और अश्व संबंधी प्रश्न; विजय-लाभ का शुभ शकुन।

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शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। यह पहले सप्तक का तीसरा दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।

रविवार का वार-विचार — राजकार्य, मणि, स्वर्ण और अश्व संबंधी प्रश्न।

मूल दोहा: राज काज मनि हेम हय राम रूप रबि बार। कहब नीक जय लाभ सुभ सगुन समय अनुहार॥३॥

शब्दार्थ:

  • राज काज = राजकार्य, सरकारी काम
  • मनि = मणि, रत्न
  • हेम = स्वर्ण, सोना
  • हय = घोड़ा
  • राम रूप = श्रीराम का स्वरूप
  • रबि बार = रविवार
  • कहब नीक = अच्छा कहूँगा
  • समय अनुहार = समयानुसार

राज काज मनि हेम हय राम रूप रबि बार = रविवार को राम-रूप का ध्यान करके राजकार्य, मणि, स्वर्ण और अश्व संबंधी प्रश्न करो। कहब नीक जय लाभ सुभ = यह विजय, लाभ और मंगल की दृष्टि से शुभ है।

भावार्थ / व्याख्या:

रविवार के दिन श्रीराम के स्वरूप का ध्यान करके राजकार्य, मणि, स्वर्ण एवं घोड़े संबंधी प्रश्न करो। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन समयानुसार विजय, लाभ, मंगल तथा भलाई की दृष्टि से शुभ है।

यहाँ से सप्तम सर्ग का वार-विचार आरंभ होता है। रविवार सूर्य का दिन है और सूर्य राजा, स्वर्ण, तेज तथा अधिकार का कारक ग्रह है। इसीलिए इन विषयों के प्रश्न रविवार को उपयुक्त बताए गए हैं।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जो सरकारी कार्य, सोना-आभूषण, वाहन या उच्च अधिकारियों से जुड़े हों — विशेषकर यदि प्रश्न रविवार को पूछा जाए।

शकुन फल:

यह शकुन विजय, लाभ और मंगल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष अनुकूल:

  • सरकारी कार्य, आवेदन या उच्च अधिकारी से मामला
  • सोना, चाँदी, रत्न या आभूषण का लेन-देन
  • वाहन की खरीद या यात्रा-साधन
  • पद, अधिकार और नेतृत्व से जुड़ा प्रश्न
  • रविवार को आरंभ किया जाने वाला कार्य

इस दोहे के आने पर विजय, लाभ और मंगल का संकेत है। सरकारी कार्य, स्वर्ण या वाहन संबंधी निर्णय — रविवार को श्रीराम का ध्यान करके आगे बढ़ें।

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