रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 2 — कुमुदिनी के चन्द्रमा और कमल के सूर्य समान हनुमानजी का हृदय-ध्यान; सर्व-सिद्धि का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। यह पहले सप्तक का दूसरा दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।
हनुमानजी का हृदय में ध्यान — सब प्रकार की सफलता।
मूल दोहा: सुख मुद मंगल कुमुद बिधु, सगुन सरोरुह भानु। करहु काज सब सिद्धि प्रभु आनि हिएँ हनुमानु॥२॥
शब्दार्थ:
- मुद = आनंद
- कुमुद = कुमुदिनी
- बिधु = चन्द्रमा
- सरोरुह = कमल
- भानु = सूर्य
- करहु काज = कार्य करो
- सब सिद्धि = सब प्रकार की सफलता
- आनि हिएँ = हृदय में लाकर
सुख मुद मंगल कुमुद बिधु, सगुन सरोरुह भानु = सुख-आनंद रूपी कुमुदिनियों के लिए चन्द्रमा और शकुन रूपी कमलों के लिए सूर्य। करहु काज सब सिद्धि = कार्य करो, सब सफलता मिलेगी।
भावार्थ / व्याख्या:
सुख, आनंद तथा मंगल रूपी कुमुदिनियों के लिए चन्द्रमा के समान और शकुन रूपी कमलों के लिए सूर्य के समान स्वामी श्रीहनुमानजी को हृदय में लाकर कार्य करो — सब प्रकार की सफलता मिलेगी।
यह रूपक अत्यंत सुंदर है। कुमुदिनी चन्द्रमा से खिलती है और कमल सूर्य से। दोनों विपरीत हैं, परंतु हनुमानजी दोनों के लिए एक साथ काम करते हैं।
भाव यह है कि हनुमानजी हर प्रकार की परिस्थिति में सहायक हैं — रात हो या दिन, सुख हो या संकट। शकुन की दृष्टि से यह दोहा सभी प्रकार के प्रश्नों में सफलता का आश्वासन देता है।
शकुन फल:
यह शकुन सब प्रकार की सफलता का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी कार्य — हर प्रकार के प्रश्न
- विपरीत परिस्थितियों में सहायता
- सुख और संकट दोनों समय का सहारा
- मंगलवार या शनिवार का कोई कार्य
- साहस और आत्मबल की आवश्यकता
इस दोहे के आने पर सब प्रकार की सफलता मिलेगी। हनुमानजी को हृदय में रखकर कार्य आरंभ करें — परिस्थिति कोई भी हो, सहायता मिलेगी।
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