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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 5 — मंगलवार को भूमि, राजा और संग्राम-विजय संबंधी शकुन-विचार; समयानुकूल मंगलदायक शकुन।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। यह पहले सप्तक का पाँचवाँ दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।

मंगलवार का वार-विचार — भूमि, राजा और युद्ध में विजय।

मूल दोहा: मंगल मंगल भूमि हित, नृप हित जय संग्राम। सगुन बिचारब समय सुभ, करि गुरु चरन प्रनाम॥५॥

शब्दार्थ:

  • मंगल = मंगलवार
  • भूमि हित = पृथ्वी, भूमि के लिए
  • नृप हित = राजा के लिए
  • जय संग्राम = युद्ध में विजय
  • सगुन बिचारब = शकुन का विचार करना
  • समय सुभ = समयानुकूल और शुभ
  • गुरु चरन प्रनाम = गुरुदेव के चरणों में प्रणाम

मंगल मंगल भूमि हित, नृप हित जय संग्राम = मंगलवार को भूमि, राजा और युद्ध-विजय के लिए। करि गुरु चरन प्रनाम = गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करके शकुन विचार करो।

भावार्थ / व्याख्या:

मंगलवार को पृथ्वी अर्थात् भूमि के लिए, राजा के लिए तथा युद्ध या विवाद में विजय के लिए गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करके शकुन का विचार करना समयानुकूल एवं शुभ है, मंगलदायक है।

मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है और मंगल भूमि, पराक्रम, युद्ध तथा भाई का कारक ग्रह है। इसीलिए इन विषयों के प्रश्न मंगलवार को उपयुक्त बताए गए हैं।

ध्यान देने योग्य है कि यहाँ ‘गुरु चरन प्रनाम’ का विशेष निर्देश है। मंगल उग्र ग्रह है, इसलिए उसके दिन शकुन विचारने से पहले गुरु का आशीर्वाद लेना आवश्यक बताया गया है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा भूमि-विवाद और मुकदमों में विशेष अनुकूल है।

शकुन फल:

यह शकुन समयानुकूल और मंगलदायक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष अनुकूल:

  • भूमि, प्लॉट या संपत्ति संबंधी विवाद
  • मुकदमा, कानूनी लड़ाई या प्रतिस्पर्धा
  • सरकारी या उच्चाधिकारी से जुड़ा मामला
  • भाई-बंधुओं से संबंधित प्रश्न
  • मंगलवार को आरंभ किया जाने वाला कार्य

इस दोहे के आने पर समय अनुकूल और मंगलदायक है। भूमि या विवाद संबंधी प्रश्न मंगलवार को करें — परंतु पहले गुरु के चरणों में प्रणाम अवश्य करें।

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