रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 1 — आकाश में विमान देखकर अयोध्यावासियों का आनंद; प्रिय मिलन होने का शुभ शकुन।
इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। प्रस्तुत दोहा षष्ठम सर्ग के दूसरे सप्तक में पहला स्थान पर है, जहाँ पुनर्मिलन और कुशल-क्षेम के शुभ संकेत मिलते हैं।
विमान देखकर अयोध्यावासियों का आनंद — प्रिय मिलन होगा।
मूल दोहा: अवध अनंदित लोग सब ब्योम बिलोकि बिमानु। नमहूँ कोकनद कोक मद मुदित उदित लखि भानु॥१॥
शब्दार्थ:
- अनंदित = आनंदित
- ब्योम = आकाश
- बिलोकि = देखकर
- बिमानु = विमान
- कोकनद = लाल कमल
- कोक = चकवा पक्षी
- मुदित = प्रसन्न
- उदित लखि भानु = उदय होते सूर्य को देखकर
अवध अनंदित लोग सब ब्योम बिलोकि बिमानु = आकाश में विमान देखकर अयोध्या के सब लोग आनंदित हैं। मुदित उदित लखि भानु = जैसे उदय होते सूर्य को देखकर।
भावार्थ / व्याख्या:
आकाश में विमान को देखकर अयोध्या के सब लोग ऐसे आनंदित हो रहे हैं, जैसे उदय होते सूर्य को देखकर कमल तथा चकवा पक्षियों का मन खिल उठता है।
कमल और चकवा दोनों सूर्य के उदय की प्रतीक्षा करते हैं — रात भर मुरझाए और बिछड़े रहते हैं। चौदह वर्ष अयोध्या भी ऐसे ही मुरझाई रही थी।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह प्रश्न-फल शुभ है और प्रिय मिलन होगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में स्पष्ट अनुकूल उत्तर देता है जहाँ किसी प्रिय से मिलने की प्रतीक्षा हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है — प्रिय मिलन होगा। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- लंबी प्रतीक्षा के बाद प्रिय से मिलन
- परदेश गए व्यक्ति की घर वापसी
- किसी शुभ समाचार का आगमन
- लंबे अंधकार के बाद प्रकाश की स्थिति
- पूरे परिवार या समाज में प्रसन्नता
इस दोहे के आने पर प्रिय मिलन का स्पष्ट संकेत है। लंबी प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है।
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