रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 2 — हनुमानजी द्वारा अशोकवन उजाड़ना और लंका-दहन; यह प्रश्न-फल अशुभ है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। पंचम सर्ग के पाँचवें सप्तक का दूसरा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें युद्ध, विजय और शत्रु-पराजय के संकेत छिपे हैं।
लंका-दहन और हाहाकार — यह प्रश्न-फल अशुभ है।
मूल दोहा: बनु उजारि जारेउ नगर कूदि कूदि कपिनाथ। हाहाकार पुकारि सब, आरत मारत माथ॥२॥
शब्दार्थ:
- बनु उजारि = वन उजाड़कर
- जारेउ नगर = नगर जला दिया
- कूदि कूदि = कूद-कूदकर
- कपिनाथ = हनुमानजी
- हाहाकार = हाहाकार
- पुकारि = चिल्लाकर
- आरत = दुःखी होकर
- मारत माथ = सिर पीटते हैं
बनु उजारि जारेउ नगर कूदि कूदि कपिनाथ = वन उजाड़कर कूद-कूदकर हनुमानजी ने नगर जला दिया। आरत मारत माथ = दुःखी होकर सिर पीट रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीहनुमानजी ने अशोकवन उजाड़कर, कूद-कूदकर लंका जला दी। सब राक्षस हाहाकार करके चिल्ला रहे हैं और दुःखी होकर सिर पीट रहे हैं।
लंका-दहन रामकथा का प्रसिद्ध प्रसंग है, परंतु शकुन की दृष्टि से यह अग्नि, विनाश और सामूहिक हाहाकार का चित्र है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘अशुभ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में स्पष्ट चेतावनी देता है जहाँ अग्नि, दुर्घटना या बड़ी हानि की आशंका हो। इस समय संपत्ति और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सतर्कता आवश्यक:
- अग्नि, दुर्घटना या संपत्ति की हानि
- बड़े नुकसान या विनाश की आशंका
- घर, दुकान या कारखाने की सुरक्षा
- अचानक आने वाली आपदा
- सामूहिक संकट या अफरातफरी
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। अग्नि और संपत्ति की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। बीमा, सुरक्षा उपकरण और सावधानी — तीनों की जाँच कर लें।
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