रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 1 — अक्षयकुमार का वध और अशोक वाटिका का विध्वंस; यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। पंचम सर्ग के पाँचवें सप्तक का पहला दोहा प्रस्तुत है, जिसमें युद्ध, विजय और शत्रु-पराजय के संकेत छिपे हैं।
अक्षयकुमार का वध और राक्षसों का भय — यह प्रश्न-फल निकृष्ट है।
मूल दोहा: रुख निपातत खात फल, रक्षक अक्ष निपाति। कालरूप बिकराल कपि, सभय निसाचर जाति॥१॥
शब्दार्थ:
- रुख निपातत = वृक्ष गिराते हुए
- खात फल = फल खाते हुए
- रक्षक = वन के रक्षक
- अक्ष = अक्षयकुमार
- निपाति = मारकर
- कालरूप = काल के समान
- बिकराल = भयंकर
- सभय = भयभीत
- निसाचर जाति = राक्षस जाति
रुख निपातत खात फल, रक्षक अक्ष निपाति = वृक्ष गिराते, फल खाते और रक्षकों तथा अक्षयकुमार को मारते हुए। सभय निसाचर जाति = राक्षस जाति भयभीत हो गई।
भावार्थ / व्याख्या:
काल स्वरूप भयंकर आकृति वाले हनुमानजी वन के रक्षकों तथा अक्षयकुमार को मारकर वृक्षों को गिरा रहे हैं और फल खा रहे हैं। उन्हें देखकर सारे निशाचर डर गए हैं।
यह दृश्य विध्वंस का है। जो अशोक वाटिका रावण का सबसे प्रिय उद्यान था, वह उजड़ रहा था।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘निकृष्ट’ कहते हैं। ध्यान दीजिए — यह हनुमानजी की विजय है, फिर भी शकुन निकृष्ट क्यों? क्योंकि रामाज्ञा प्रश्न में शकुन प्रश्नकर्ता की दृष्टि से देखा जाता है, और यह दोहा विनाश, भय और उथल-पुथल का चित्र है। ऐसे समय में शांति नहीं रहती।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल निकृष्ट है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:
- चारों ओर उथल-पुथल और अशांति की स्थिति
- किसी संपत्ति, बाग या निर्माण को हानि
- भय और आतंक का वातावरण
- किसी बलशाली विरोधी का आक्रमण
- अपनों की सुरक्षा को लेकर चिंता
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल निकृष्ट है। इस समय उथल-पुथल का दौर है। सुरक्षा को प्राथमिकता दें और कोई नया आरंभ न करें।
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