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रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 7 — तुलसी-वन और कमल-वन समस्त कल्याणों का निवास; रामभक्तों के लिए शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। यह दोहा पंचम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से सातवाँ है — यहाँ भक्ति, बल और बुद्धि तीनों का संयोग है।

तुलसी-वन और कमल-वन — रामभक्तों के लिए शुभ शकुन।

मूल दोहा: तुलसी कानन कमल बन, सकल सुमंगल बास। राम भगत हित सगुन सुभ, सुमिरत तुलसीदास॥७॥

शब्दार्थ:

  • कानन = वन
  • कमल बन = कमलों का वन
  • सकल सुमंगल = समस्त उत्तम कल्याण
  • बास = निवास
  • राम भगत हित = रामभक्तों के लिए
  • सुमिरत = स्मरण करना

तुलसी कानन कमल बन, सकल सुमंगल बास = तुलसी-वन और कमल-वन समस्त कल्याणों का निवास है। राम भगत हित सगुन सुभ = रामभक्तों के लिए यह शुभ शकुन है।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी कहते हैं कि तुलसी का वन अथवा कमल-वन समस्त उत्तम कल्याणों का निवास है और उसका स्मरण करना श्रीरामभक्त के लिए शुभ शकुन है।

तुलसी और कमल — दोनों श्रीराम को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी घर-आँगन में मिलती है और कमल जल में। दोनों की विशेषता यह है कि वे अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध करते हैं।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा भक्तों के लिए शुभ है। इसका व्यावहारिक संदेश यह है कि घर में तुलसी की सेवा करें और अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध रखें — कल्याण स्वयं आएगा।

शकुन फल:

यह रामभक्तों के लिए शुभ शकुन है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • भक्ति, पूजा और आध्यात्मिक साधना
  • घर की शुद्धि, तुलसी-सेवा या वास्तु
  • स्वास्थ्य और आरोग्य से जुड़ा प्रश्न
  • पवित्र स्थान या शुद्ध वातावरण की तलाश
  • सरल उपाय से मिलने वाला कल्याण

इस दोहे के आने पर रामभक्तों के लिए शुभ संकेत है। घर में तुलसी की सेवा करें और वातावरण शुद्ध रखें — कल्याण स्वयं आएगा।

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