रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 6 — साथियों को संतोष देकर, इष्ट-स्मरण कर हनुमानजी का पर्वत पर चढ़ना; यात्रा का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। यह पहले सप्तक का छठा दोहा है। पंचम सर्ग हनुमानजी के समुद्र-लंघन से लेकर रावण-वध तक के पराक्रम का सर्ग है।
पर्वत पर चढ़कर छलाँग की तैयारी — यात्रा के लिए शुभ शकुन।
मूल दोहा: राखि तोषि सबु साथ सुभ, सगुन सुमंगल पाइ। कुदि कुधर चढ़ि आनि उर, सीय सहित दोउ भाइ॥६॥
शब्दार्थ:
- राखि = रखकर
- तोषि = संतोष देकर
- सबु साथ = सब साथियों को
- सगुन सुमंगल पाइ = मंगलकारी शकुन पाकर
- कुदि = कूदकर
- कुधर = पर्वत
- चढ़ि = चढ़कर
- आनि उर = हृदय में लाकर
राखि तोषि सबु साथ सुभ = सब साथियों को संतोष देकर वहीं रखकर। सीय सहित दोउ भाइ आनि उर = सीताजी सहित दोनों भाइयों को हृदय में लाकर।
भावार्थ / व्याख्या:
साथ के सब लोगों को वहीं रहने को कहकर और संतोष देकर, उत्तम मंगलकारी शकुन पाकर, श्रीजानकीजी के साथ दोनों भाइयों को हृदय में लाकर हनुमानजी कूदकर पर्वत पर चढ़ गए।
इस दोहे में तैयारी का पूरा क्रम है — पहले साथियों को संतुष्ट किया, फिर शकुन देखा, फिर इष्ट का स्मरण किया, और तब छलाँग की तैयारी की।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह यात्रा के लिए शुभ शकुन है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी बड़े प्रयास से पहले की तैयारी विषय हो।
शकुन फल:
यह यात्रा के लिए शुभ शकुन है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- यात्रा या किसी बड़े अभियान का आरंभ
- किसी बड़े प्रयास से पहले की तैयारी
- साथियों को समझाकर अकेले आगे बढ़ना
- ऊँचाई पर चढ़ना या बड़ा कदम उठाना
- अकेले किसी कठिन कार्य को स्वीकार करना
इस दोहे के आने पर यात्रा के लिए शुभ शकुन है। तैयारी पूरी करके, इष्ट का स्मरण करके प्रस्थान करें — सफलता मिलेगी।
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