रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 4 — ‘राम काज लगि जनमु’ सुनकर हनुमानजी का हर्ष; रामभक्त बलवान पुत्र का शुभ शकुन।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। यह पहले सप्तक का चौथा दोहा है। पंचम सर्ग हनुमानजी के समुद्र-लंघन से लेकर रावण-वध तक के पराक्रम का सर्ग है।
जीवन का उद्देश्य जानकर हनुमानजी का हर्ष — बलवान पुत्र का शकुन।
मूल दोहा: राम काज लगि जनमु सुनि हरषे हनुमान। होइ पुत्र फलु सगुन सुभ, राम भगतु बलवान॥४॥
शब्दार्थ:
- राम काज लगि = श्रीराम के कार्य के लिए
- जनमु = जन्म
- जनमु = संसार में
- सुनि = सुनकर
- हरषे = प्रसन्न हुए
- होइ = होगा
- पुत्र फलु = पुत्र रूपी फल
- राम भगतु = रामभक्त
- बलवान = बलवान
राम काज लगि जनमु जग = तुम्हारा जन्म ही श्रीराम का कार्य करने के लिए हुआ है। होइ पुत्र फलु सगुन सुभ = यह शकुन शुभ है, रामभक्त बलवान पुत्र होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
‘तुम्हारा संसार में जन्म ही श्रीराम का कार्य करने के लिए हुआ है’ — यह सुनकर हनुमानजी प्रसन्न हो गए।
यह क्षण महत्वपूर्ण है। जब किसी को उसके जीवन का उद्देश्य समझ आ जाता है, तब उसकी सारी शक्ति एक दिशा में केंद्रित हो जाती है।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल बताते हैं — यह शकुन शुभ है और इसका फल यह है कि रामभक्त बलवान पुत्र होगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा संतान-प्राप्ति के प्रश्नों में शुभ है, और साथ ही जीवन के उद्देश्य की स्पष्टता का भी सूचक है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है और बलवान पुत्र का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- संतान प्राप्ति, विशेषकर बलवान और भक्त पुत्र
- जीवन के उद्देश्य या दिशा की स्पष्टता
- अपनी भूमिका या कर्तव्य को समझना
- किसी बड़े कार्य के लिए चुने जाने का अवसर
- उत्साह और प्रेरणा की प्राप्ति
इस दोहे के आने पर शकुन शुभ है। संतान के प्रश्न में अनुकूल फल है, और साथ ही जीवन के उद्देश्य पर स्पष्टता भी मिलेगी।
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