रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 1 — राम-नाम कल्पवृक्ष, रामभक्ति कामधेनु और गुरु-चरण-रज सब कल्याणों की जड़; शुभ प्रश्न-फल।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। यह पहले सप्तक का पहला दोहा है। पंचम सर्ग हनुमानजी के समुद्र-लंघन से लेकर रावण-वध तक के पराक्रम का सर्ग है।
पंचम सर्ग का आरंभ — राम-नाम, राम-भक्ति और गुरु-चरण-रज की महिमा।
मूल दोहा: राम नाम कलि कामतरु राम भगति सुरधेनु। सगुन सुमंगल मूल जग गुरु पद पंकज रेनु॥१॥
शब्दार्थ:
- कलि = कलियुग
- कामतरु = कल्पवृक्ष
- सुरधेनु = कामधेनु
- सगुन सुमंगल मूल = शुभ शकुनों और कल्याणों की जड़
- गुरु पद = गुरुदेव के चरण
- पंकज = कमल
- रेनु = धूलि, रज
राम नाम कलि कामतरु, राम भगति सुरधेनु = कलियुग में राम-नाम कल्पवृक्ष है और रामभक्ति कामधेनु। गुरु पद पंकज रेनु = गुरुदेव के चरण-कमलों की धूलि सब कल्याणों की जड़ है।
भावार्थ / व्याख्या:
कलियुग में श्रीराम-नाम कल्पवृक्ष है, जो मनचाही वस्तु देता है, और रामभक्ति कामधेनु है, जो अभीष्ट पूर्ण करती है। परंतु तुलसीदास जी इससे भी आगे जाते हैं।
वे कहते हैं कि गुरुदेव के चरण-कमलों की धूलि जगत में सारे शुभ शकुनों तथा कल्याणों की जड़ है।
ध्यान देने योग्य है कि कल्पवृक्ष और कामधेनु — दोनों ‘देने वाले’ हैं, परंतु गुरु-चरण-रज को ‘मूल’ अर्थात् जड़ कहा गया है। जड़ के बिना वृक्ष नहीं। अर्थात् गुरु की कृपा के बिना नाम और भक्ति भी नहीं मिलती। शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है और गुरु से जुड़े प्रश्नों में विशेष अनुकूल।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- गुरु से दीक्षा, मार्गदर्शन या आशीर्वाद
- नाम-जप, भक्ति या साधना का आरंभ
- कोई भी मनचाही वस्तु या इच्छा
- किसी योग्य मार्गदर्शक की तलाश
- आध्यात्मिक उन्नति और कल्याण
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। गुरु का आशीर्वाद अवश्य लें — नाम और भक्ति का फल उसी से मिलता है।
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