रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 7 — अयोध्या में घर-घर मंगलाचार; चतुर्थ सर्ग का अंतिम दोहा, श्रीराम सब समय अनुकूल हैं।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें सातवाँ दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
यह चतुर्थ सर्ग का अंतिम, उनचासवाँ दोहा है — श्रीराम सब समय अनुकूल हैं।
मूल दोहा: चौथ चारु उनचास पुर घर घर मंगलचार। तुलसिहि सब दिन दाहिने दसरथ राजकुमार॥७॥
शब्दार्थ:
- चौथ = चौथे सर्ग का
- चारु = सुंदर
- उनचास = उनचासवाँ दोहा
- पुर = नगर
- घर घर = हर घर में
- मंगलचार = मंगलाचार
- तुलसिहि = तुलसीदास के लिए
- सब दिन = सब समय
- दाहिने = अनुकूल
चौथ चारु उनचास पुर घर घर मंगलचार = चौथे सर्ग का यह सुंदर उनचासवाँ दोहा, नगर के घर-घर मंगलाचार। सब दिन दाहिने दसरथ राजकुमार = दशरथकुमार श्रीराम सब समय अनुकूल हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
अयोध्या में घर-घर मंगलाचार हो रहा है। तुलसीदास जी कहते हैं कि चौथे सर्ग का यह उनचासवाँ दोहा शुभ है और दशरथकुमार श्रीराम सब समय अनुकूल हैं।
‘सब दिन दाहिने’ अत्यंत महत्वपूर्ण पद है। ‘दाहिना होना’ का अर्थ है अनुकूल होना, प्रसन्न होना। और ‘सब दिन’ अर्थात् किसी एक दिन नहीं, हमेशा।
चतुर्थ सर्ग रामाज्ञा प्रश्न का सबसे मंगलमय सर्ग है — इसमें एक भी अत्यंत अशुभ दोहा नहीं है, क्योंकि यह पूरा सर्ग राम-जन्म से विवाह तक के आनंदमय प्रसंगों का है। और उसका समापन इस पूर्ण आश्वासन पर होता है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है — श्रीराम सब समय अनुकूल हैं। निम्नलिखित सभी प्रश्नों में:
- कोई भी कार्य, कोई भी समय — सब अनुकूल
- लंबे समय तक चलने वाली अनुकूलता
- घर-परिवार में निरंतर मंगल
- किसी कार्य के समय को लेकर संशय
- भाग्य और दैवी कृपा से जुड़ा प्रश्न
इस दोहे के आने पर श्रीराम सब समय अनुकूल हैं। किसी भी प्रकार का संशय न रखें — जो भी करेंगे, मंगल ही होगा।
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